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सोना-चांदी धड़ाम! एक ही दिन में ₹15,000 की भारी गिरावट, खरीदने का सही समय या अभी और गिरेंगे दाम?

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मुंबई: वैश्विक बाजारों में मंदी और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय वित्तीय बाजार में सोमवार को बड़ा हड़कंप देखने को मिला. अंतरराष्ट्रीय बाजार में बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में आई भारी गिरावट के चलते घरेलू बाजार में सोना और चांदी के दाम 6 प्रतिशत तक लुढ़क गए. वहीं, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी पूंजी की निकासी के कारण भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.84 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया.

सोना-चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर आज कारोबार की शुरुआत बेहद कमजोर रही. सुबह 9:40 बजे तक, अप्रैल वायदा सोने की कीमतों में 5.59 प्रतिशत यानी 8,089 रुपये की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिससे भाव 1,36,403 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया.

चांदी की स्थिति और भी गंभीर रही. चांदी की कीमतों में 6.63 प्रतिशत (15,043 रुपये) की भारी गिरावट आई, जिससे यह 2,11,729 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी स्पॉट गोल्ड 3.80 प्रतिशत गिरकर 4,320.19 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जो पिछले नौ सत्रों से लगातार गिरावट का संकेत है.

रुपये में रिकॉर्ड गिरावट और कच्चे तेल का दबाव
मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये ने आज अपनी सबसे कमजोर स्थिति देखी. डॉलर के मुकाबले रुपया 93.84 के स्तर पर जा गिरा. विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) 112.95 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड 101.50 डॉलर पर कारोबार कर रहा है. भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने रुपये पर भारी दबाव बनाया है.

गिरावट के मुख्य कारण

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति (Inflation) की चिंता बढ़ा दी है. निवेशकों को डर है कि बढ़ती महंगाई को रोकने के लिए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में और बढ़ोतरी कर सकते हैं. आमतौर पर तनाव के समय सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन वर्तमान में डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड में बढ़त के कारण निवेशक सोने से पैसा निकालकर डॉलर की ओर भाग रहे हैं.

शेयर बाजार का हाल
सर्राफा और मुद्रा बाजार के साथ-साथ शेयर बाजार में भी बिकवाली का दौर रहा. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी शुरुआती कारोबार में 2-2 प्रतिशत टूट गए. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकालने के कारण बाजार में अस्थिरता बनी हुई है.

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