ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच भारत और दुनिया के देशों के तेल स्टॉक की स्थिति: आपूर्ति कितने दिनों तक चल सकती है

युद्ध का असर: ईंधन संकट पर वैश्विक दबाव, भारत और अन्य देशों के पास कितने दिन तक तेल की आपूर्ति सुरक्षित
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में भूचाल ला दिया है। इस संघर्ष का असर केवल भारत पर ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया पर महसूस किया जा रहा है। तेल आपूर्ति पर बढ़ते दबाव के चलते हर देश अपने पास उपलब्ध स्टॉक से जरूरतें पूरी करने की कोशिश कर रहा है।
भारत: स्टॉक में 3.9 करोड़ बैरल, कुल 74 दिनों का बैकअप
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के अनुसार, भारत के पास वर्तमान में स्टॉक में 3.9 करोड़ बैरल तेल उपलब्ध है। भारत की आबादी लगभग 144 करोड़ है और प्रति व्यक्ति तेल खपत 0.6 लीटर प्रतिदिन है।
इस हिसाब से, केवल स्टॉक में मौजूद तेल 9.5 दिन तक देश की जरूरत पूरी कर सकता है। हालांकि, यदि भारत के रिफाइनरी और पोर्ट्स में मौजूद 25 करोड़ बैरल तेल को जोड़ दिया जाए, तो देश के पास कुल 74 दिनों का बैकअप मौजूद है।
भारत ने मिडिल ईस्ट से ईंधन की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ईरान से बातचीत भी की है, जिससे देश में आपूर्ति प्रभावित नहीं हो रही।
जापान: स्टॉक सबसे अधिक, 230 दिनों तक आपूर्ति संभव
जापान के पास 32.4 करोड़ बैरल तेल स्टॉक में है। जापान की आबादी 12.2 करोड़ है और प्रति व्यक्ति तेल की खपत 4 लीटर प्रतिदिन है।
इस स्टॉक के आधार पर जापान लगभग 230 दिनों तक अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरा कर सकता है।
चीन: 90 दिनों का स्टॉक, 110 करोड़ बैरल तेल उपलब्ध
चीन के पास 110 करोड़ बैरल से अधिक तेल स्टॉक में है। चीन की आबादी लगभग 141 करोड़ है और प्रति व्यक्ति खपत 1.8 लीटर प्रतिदिन है।
इस स्थिति में चीन के पास अपने देश की आवश्यकताओं के लिए करीब 90 दिनों का बैकअप मौजूद है।
अमेरिका: 85 दिनों का स्टॉक, प्रति व्यक्ति खपत सबसे ज्यादा
अमेरिका के पास स्टॉक में 41.54 करोड़ बैरल तेल उपलब्ध है। अमेरिकी आबादी 34.2 करोड़ है और यहां प्रति व्यक्ति 8.2 लीटर तेल प्रतिदिन की खपत होती है।
इस स्टॉक के आधार पर अमेरिका की आपूर्ति लगभग 85 दिनों तक निर्बाध रूप से चल सकती है।
निष्कर्ष:
मिडिल ईस्ट के संघर्ष और युद्ध की वजह से वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है।
- भारत के पास आपूर्ति के लिए 74 दिनों का बैकअप है।
- जापान सबसे सुरक्षित स्थिति में है, 230 दिनों का स्टॉक उपलब्ध।
- चीन और अमेरिका क्रमशः 90 और 85 दिनों तक अपनी जरूरतें पूरा कर सकते हैं।
इस डेटा से स्पष्ट है कि देशों ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्टॉक और आयात दोनों का संतुलित उपयोग करना शुरू कर दिया है।






