Indian Navy MiG-29K Initiative: आत्मनिर्भर भारत की ओर बड़ा कदम, नौसेना ने स्वदेशी कंपनियों को दिया मौका

नई दिल्ली। भारतीय नौसेना ने आत्मनिर्भरता और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिए एक अहम पहल करते हुए रूसी मूल के MiG-29K लड़ाकू विमानों की महत्वपूर्ण उप-प्रणालियों और परीक्षण प्रणालियों के स्वदेशी विकास हेतु भारतीय निजी कंपनियों को आमंत्रित किया है।
नौसेना की इस पहल का उद्देश्य विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करना और विमान के अहम पुर्जों में देश को आत्मनिर्भर बनाना है। इससे समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में तैनात फाइटर जेट्स की ऑपरेशनल क्षमता और तत्परता को मजबूत किया जा सकेगा।
MiG-29K एक अत्याधुनिक, हर मौसम में काम करने वाला सुपरसोनिक मल्टी-रोल फाइटर जेट है, जो भारतीय नौसेना के विमानवाहक पोत INS Vikramaditya और INS Vikrant से संचालित होता है। यह विमान हवाई वर्चस्व, समुद्री हमले और समुद्री नियंत्रण जैसे अहम मिशनों में तैनात रहता है।
नौसेना को लंबे समय से इन विमानों के रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता और सर्विसेबिलिटी को लेकर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार आवश्यक पुर्जे समय पर उपलब्ध नहीं हो पाते, जिससे ऑपरेशनल क्षमता प्रभावित होती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए अब निजी कंपनियों, MSME और रक्षा क्षेत्र की फर्मों को इस परियोजना से जोड़ा जा रहा है, ताकि स्वदेशी स्तर पर इन समस्याओं का समाधान किया जा सके।
नौसेना ने उन भारतीय कंपनियों को आमंत्रित किया है जिनके पास तकनीकी विशेषज्ञता, वित्तीय क्षमता और आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध है। ये कंपनियां संभवतः सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा उपक्रमों और अनुसंधान संस्थानों के साथ मिलकर काम करेंगी।
पहल न केवल रक्षा उत्पादन में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देगी, बल्कि सप्लाई चेन को मजबूत कर राष्ट्रीय सुरक्षा को भी सुदृढ़ करेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।






