INTERVIEW: ओडिसी नृत्य को छत्तीसगढ़ में पहचान दिलाने की तैयारी, नृत्यांगना आर्या नंदे की ‘क्लासिकल जर्नी’

| सवाल: कितने क्लासिकल डांस होते हैं, जिनमें से एक ओडिसी है? |
जवाब: भारत में कुल 8 शास्त्रीय नृत्य हैं, जिनमें से एक ओडिसी नृत्य है, जो ओडिशा से संबंधित है. इसकी शुरुआत भगवान जगन्नाथ के मंदिर से हुई, जहां देवदासी नृत्य प्रस्तुत करती थीं. मंदिर की मूर्तियों और उनकी भंगिमाओं से प्रेरित होकर ओडिसी नृत्य विकसित हुआ. भगवान जगन्नाथ की मुद्रा को “चौको” कहा जाता है, जो ओडिसी का मुख्य आकर्षण है. ओडिसी का प्रचार अब देश-विदेश में हो रहा है. मैं चाहती हूं कि छत्तीसगढ़ में भी इसे उतना ही सम्मान मिले. मेरी संस्था नृत्य श्री धारा डांस एकेडमी रायपुर, सारंगढ़ और रायगढ़ में संचालित है.
| सवाल: कथक और ओडिसी में क्या अंतर है? |
जवाब: मैं रायगढ़ की रहने वाली हूं, जो कथक का प्रमुख घराना है. मेरी पहली प्रस्तुति चक्रधर समारोह में हुई थी, जो राजा चक्रधर की जयंती पर आयोजित होता है. कथक और ओडिसी में मुख्य अंतर यह है कि कथक में फुटवर्क (पैरों की थाप) पर अधिक ध्यान होता है. इसमें शरीर सीधा रहता है और चक्कर (स्पिन) अधिक होते हैं.
वहीं ओडिसी में सिर से पैर तक पूरे शरीर की भंगिमाएं होती हैं. इसमें “चौको” और “त्रिभंगी” जैसी विशेष मुद्राएं होती हैं. ओडिसी में मूवमेंट अधिक लचीले और अभिव्यक्तिपूर्ण होते हैं.

बच्चों को ओडिसी नृत्य सीखाकर छत्तीसगढ़ में पहचान दिलाने की तैयारी
| सवाल: आपने ओडिसी की शुरुआत कब की और कहां-कहां प्रस्तुति दी? |
जवाब: मैंने कक्षा 5वीं से ओडिसी सीखना शुरू किया और इस क्षेत्र में मुझे लगभग 20 साल हो चुके हैं. छत्तीसगढ़ में ओडिसी डांस का कोई स्कोप नहीं था. इस वजह से मैं भुवनेश्वर में जाकर ओडिसी डांस सीखा करती थी. पहली प्रस्तुति मेरी चक्रधर समारोह, रायगढ़ (2012) फिर दूसरी प्रस्तुति 2014 और अब मैं इस समारोह की कमेटी मेंबर भी हूं. मुझे मेरे गुरु डॉ. गजेंद्र कुमार पंडा, माता-पिता और नाना जी का पूरा सहयोग मिला. बाकी देश के दूसरे राज्यों के साथ ही दूसरे देशों में भी ओडिसी नृत्य को सराहा जाता है. मलेशिया सिंगापुर जापान इंडोनेशिया थाईलैंड बैंकॉक इन जगहों पर ओडिसी नृत्य को पूजा जाता है. मैं चाहती हूं कि छत्तीसगढ़ के लोग भी इस कला को अपनाएं, इसलिए मैंने 15 दिन का वर्कशॉप आयोजित किया है. मेरी जो संस्था है नित्य श्री धारा वह कला केंद्र में चलती है, जो कि सोमवार से रविवार तक संचालित होती है. रेगुलर क्लासेस कला केंद्र रायपुर में संचालित होती है.
| सवाल: आगे क्या करना चाहेंगी? |
जवाब: मैं आगे भी इसी क्षेत्र में रहना चाहती हूं. मेरे गुरु और माता-पिता ने हमेशा कहा है कि एक ही दिशा में पूरी मेहनत करो. मैं ओडिसी नृत्य में अपना नाम पूरे विश्व में बनाना चाहती हूं और इस क्षेत्र में पीएचडी भी करना चाहती हूं. हेमा मालिनी भरतनाट्यम डांसर है. इसी तरह अभिनेत्री मीनाक्षी शेषाद्री भरतनाट्यम की डांसर है. उन्होंने फ़िल्म जगत में अपना नाम कमाया और क्लासिकल जगत में भी अपने नाम को आगे बढ़ाया. उन्होंने अभिनेत्री हेमा मालिनी के उस इंटरव्यू का भी जिक्र किया है जिसमें हेमा मालिनी ने कहा है कि मैं आज जहां भी हूं क्लासिकल फील्ड की वजह से हूं. फिल्म लाइन में भी क्लासिकल डांसर को बहुत ज्यादा स्कोप मिलता है. बिना प्रैक्टिस और बिना इंटरव्यू के उनका सिलेक्शन फिल्मों में हो जाता है. मेरा अपना मानना है कि मैं एक ओडिसी डांसर बनकर पूरे विश्व में मेरा नाम हो. कलाकारों को आगे बढ़ाने में मीडिया का भी रोल रहता है. भगवान चाहे तो मुझे इसमें डॉक्टरेट की उपाधि मिलेगी.

20 सालों से जारी ओडिसी नृत्यांगना आर्या नंदे का सफर
| सवाल: ओडिसी में कौन-कौन से स्टेप महत्वपूर्ण हैं? |
जवाब: ओडिसी नृत्य के मुख्य तत्व हैं चौको, त्रिभंगी, भ्रामरी और अंग संचालन. इसमें रोज अभ्यास (रियाज) बहुत जरूरी है. मैं आज भी बच्चों के साथ 8 घंटे अभ्यास करती हूं. इस कला में कोई शॉर्टकट नहीं है. जितनी मेहनत करेंगे, उतना निखार आएगा. मेरा मानना है कि शास्त्रीय नृत्य सीधे भगवान से जुड़ा होता है, इसलिए इसमें समर्पण और अनुशासन जरूरी है. मैं अपने गुरु जी के सामने हमेशा स्टूडेंट बनकर रहना चाहती हूं. मन में जिस दिन भी ऐसा आया कि हम अच्छे मुकाम पर पहुंच गए हैं या अच्छे डांसर हो गए हैं उसी दिन भगवान उतनी ही तेजी से आपको नीचे गिरा देंगे. क्योंकि मेरा यह मानना है कि जितनी भी शास्त्रीय नृत्य हैं वह सीधे प्रभु से कनेक्ट है. कोई भी चीज को हासिल करना इसके लिए मध्यम सभी होते हैं लेकिन मेहनत भी उतना ही जरुरी होता है. वह अपने ऊपर ही होता है.






