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मिडिल ईस्ट तनाव का असर भारत पर: गैस सप्लाई ठप, ऊर्जा संकट की आशंका

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नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का सीधा असर अब भारत पर भी दिखाई देने लगा है। ईरान द्वारा रास लफान (कतर) स्थित दुनिया के सबसे बड़े गैस प्लांट पर मिसाइल हमले के बाद भारत की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो गई है। इस हमले के चलते कतर से आने वाली गैस सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे देश में ईंधन संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है।

जानकारों के अनुसार, भारत अपनी प्राकृतिक गैस जरूरतों के लिए कतर पर काफी निर्भर है। ताजा हालात में देश के कुल गैस आयात का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हुआ है। रोजाना मिलने वाली लगभग 47.4 MMSCMD गैस सप्लाई रुकने से बिजली उत्पादन और उर्वरक (फर्टिलाइजर) उद्योग पर सबसे ज्यादा असर पड़ने की संभावना है।

ऊर्जा संकट से बढ़ सकती हैं दिक्कतें
गैस आपूर्ति बाधित होने के बाद सरकार ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। संकेत मिले हैं कि घरेलू उपभोक्ताओं (PNG) और वाहनों (CNG) के लिए गैस बचाने हेतु उद्योगों को मिलने वाली गैस सप्लाई में कटौती की जा सकती है। इससे उत्पादन लागत बढ़ेगी और औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।

समुद्री मार्ग भी बना चुनौती
मौजूदा हालात में होर्मुज जलडमरूमध्य भी संवेदनशील बना हुआ है। इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही पर खतरा मंडरा रहा है। यही मार्ग भारत सहित कई देशों के लिए ऊर्जा आपूर्ति की मुख्य लाइफलाइन है।

विकल्प तलाशने में जुटी सरकार
स्थिति को संभालने के लिए भारत सरकार वैकल्पिक स्रोतों की तलाश में जुट गई है। संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से गैस आयात बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है, ताकि संभावित ऊर्जा संकट को टाला जा सके।

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