देश विदेश

अमेरिका-ईरान संघर्ष में शांति के संकेत, युद्धविराम की संभावनाएं बढ़ीं

Advertisement

वॉशिंगटन/तेहरान। पिछले 26 दिनों से जारी अमेरिका और ईरान के बीच तनावपूर्ण संघर्ष के बीच अब शांति की संभावनाएं दिखाई देने लगी हैं। दोनों पक्षों की ओर से मिले हालिया संकेतों से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि जल्द ही युद्धविराम पर सहमति बन सकती है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में सरकार ने ईरान को 15-सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्रस्ताव के तहत एक महीने के अस्थायी युद्धविराम के दौरान दोनों पक्ष बातचीत करेंगे। इसमें ईरान के समृद्ध यूरेनियम को सौंपने और आगे यूरेनियम संवर्धन पर रोक लगाने जैसे प्रावधान शामिल बताए जा रहे हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर सहमति के संकेत

ईरान ने भी सकारात्मक रुख दिखाते हुए संकेत दिया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य से ‘गैर-शत्रुतापूर्ण जहाजों’ को सुरक्षित मार्ग देने के लिए तैयार है, बशर्ते वे किसी भी प्रकार की आक्रामक गतिविधि में शामिल न हों। इस मार्ग को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

ईरान ने यह भी कहा है कि ऐसे जहाज जो निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन करेंगे और संघर्ष में शामिल नहीं होंगे, उन्हें सुरक्षित मार्ग दिया जाएगा। इससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को राहत मिलने की उम्मीद है।

कूटनीतिक प्रयास और संभावित समझौता

रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका ने पाकिस्तान के माध्यम से ईरान तक संदेश पहुंचाया है। प्रस्ताव में यह भी शामिल बताया जा रहा है कि यदि समझौता होता है तो ईरान पर लगे प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जा सकता है और उसे नागरिक परमाणु ऊर्जा विकास में सहायता दी जा सकती है, खासकर बुशहर क्षेत्र में।

हालांकि, अभी तक ईरान ने अमेरिका के साथ किसी औपचारिक वार्ता की पुष्टि नहीं की है, लेकिन संकेतों को सकारात्मक माना जा रहा है।

ट्रंप का बयान और संकेत

डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा कि ईरान ने उन्हें एक “महत्वपूर्ण तोहफा” भेजा है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ा हुआ है। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका ऐसे लोगों से बातचीत कर रहा है जो समाधान की दिशा में काम कर रहे हैं, हालांकि उन्होंने विस्तृत जानकारी साझा नहीं की।

तेल कीमतों में गिरावट

युद्धविराम की उम्मीदों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड और WTI क्रूड दोनों में 6–7 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वैश्विक महंगाई और भारत के चालू खाता घाटे पर दबाव कम हो सकता है।

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बावजूद दोनों पक्षों से मिल रहे संकेत कूटनीतिक समाधान की ओर इशारा कर रहे हैं। यदि प्रस्तावित युद्धविराम पर सहमति बनती है, तो यह न केवल क्षेत्रीय स्थिरता बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी राहत भरा कदम साबित हो सकता है।

Advertisement
Advertisement

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button