पश्चिम एशिया तनाव से ऊर्जा संकट की आशंका, वैश्विक स्तर पर असर

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास हालात बिगड़ने और ईरान, अमेरिका व इज़राइल के बीच बढ़ते टकराव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति यदि जल्द सामान्य नहीं हुई तो कई देशों को ऊर्जा बचत के लिए कठोर कदम उठाने पड़ सकते हैं।
हालांकि इसे औपचारिक रूप से “लॉकडाउन” नहीं कहा जा रहा है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इसे ‘एनर्जी लॉकडाउन’ जैसी स्थिति के रूप में देखा जा रहा है, जहां ऊर्जा की खपत को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न देशों में नीतिगत बदलाव किए जा रहे हैं।
कई देशों में बदलाव शुरू
पाकिस्तान, थाईलैंड, वियतनाम और फिलीपींस जैसे देशों में ऊर्जा बचत के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। इनमें—
- वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा
- सरकारी कार्यालयों में कार्यदिवसों में कटौती
- एयर कंडीशनर उपयोग पर सीमाएं
- स्कूल और कॉलेजों को ऑनलाइन मोड में शिफ्ट करना
ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है। हवाई मार्गों में व्यवधान के कारण उड़ानों में कटौती की गई है, जबकि कुछ देशों में निजी वाहनों के उपयोग को नियंत्रित करने के उपाय अपनाए जा रहे हैं।
भारत में स्थिति
भारत में फिलहाल बिजली आपूर्ति सामान्य बनी हुई है, लेकिन पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति और कीमतों पर दबाव महसूस किया जा रहा है। एलपीजी सप्लाई को लेकर भी संभावित असर को देखते हुए वितरण प्रणाली में बदलाव पर विचार किया जा रहा है।
आईटी सेक्टर की कुछ कंपनियां भी वर्क फ्रॉम होम या हाइब्रिड मॉडल की ओर लौट रही हैं, जिससे ऊर्जा खपत को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सके।
वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने महंगाई की चिंता को और बढ़ा दिया है। इस स्थिति को देखते हुए सरकारें और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं ऊर्जा संरक्षण पर जोर दे रही हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संसद में स्थिति को गंभीर बताते हुए राज्यों से समन्वय बनाकर काम करने की अपील की है। उन्होंने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय जहाजों की मौजूदगी को लेकर भी चिंता जताई है, क्योंकि इससे व्यापारिक आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
पश्चिम एशिया का तनाव अब केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रहा, बल्कि इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर स्पष्ट दिखाई देने लगा है। भले ही भारत में फिलहाल कोई आपात स्थिति नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा बचत और वैकल्पिक उपायों पर ध्यान देना आने वाले समय में बेहद जरूरी हो सकता है।






