छत्तीसगढ़ में किसानों के लिए नई व्यवस्था: जल्द शुरू होगा ‘ई-उर्वरक सिस्टम’, खाद वितरण होगा पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में अब जल्द ही किसानों को खाद वितरण के लिए एक नई व्यवस्था शुरू की जाने वाली है। यह ई- उर्वरक सिस्टम कहा जाएगा। उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें, तो इस सिस्टम को राज्य मंत्रि परिषद (कैबिनेट) की मंजूरी के बाद लागू किया जाएगा। खास बात ये है कि अब किसानों को उनकी खेत में लगी फसल के आधार पर ही खाद दी जाएगी। यही नहीं, किसानों को उनकेक्षेत्र की सोसाइटी से खाद के लिए टोकन हासिल करना होगा, टोकन भी तभी जारी होगा, जब संबंधित सोसाइटी में खाद उपलब्ध होगी।
राज्य में खाद वितरण की यह नई व्यवस्था लागू होने से पहले अब तक ये होता रहा है कि किसान अपने क्षेत्र की सोसाइटी से जरुरत के मुताबिक खाद लेते रहे है। लेकिन अब इतनी आसानी से खाद नहीं मिलने वाली है। लेकिन व्यवस्था लागू होने के बाद किसानों को खाद के लिए बार-बार सोसाइटी के चक्कर लगाने की जरुरत भी नहीं होगी। जब सोसाइटी में खाद उपलब्ध होगी तभी किसानों का टोकन कटेगा। टोकन के आधार पर किसानों को खाद मिल जाएगी। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि यह बदलाव इसलिए किया जा रहा है कि ताकि खाद की कालाबाजारी पर अंकुश लगाया जा सके। वैज्ञानिकों की सलाह पर बन रहा है
ई- उर्वरक सिस्टम बनाने में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की बड़ी भूमिका
सिस्टमउच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, ई- उर्वरक सिस्टम बनाने में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की बड़ी भूमिका है। वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर यह तय किया गया है कि कितने रकबे के लिए कौन सी खाद की जरुरत कितनी मात्रा में होगी। बताया गया है कि वैज्ञानिकों ने विभिन्न किस्म की फसलों के लिए नौ प्रकार के उर्वरक की डोजिंग तैयार की है। इसका मतलब ये है कि कौन सी फसल को कितने रकबे के लिए कितनी खाद की जरूरत होगी
तीन पोर्टलों के जरिए होगा ये काम
बताया गया है कि ई उर्वरक सिस्टम लागू करने के लिए एग्रीस्टैक पोर्टल, भुईयां और यूनिफाइड फार्मर पोर्टल का उपयोग किया जाएगा। इसमें किसानों की फार्मर आईडी देखी जाएगी, भुईयां पोर्टल से पता लगेगा कि किसान की जमीन कितनी है और युनिफाईड फार्मर पोर्टल से पता लगेगा कि किसान की जमीन पर कौन सी फसल लगी हुई है। इसी आधार पर यह तय होगा कि किसान को कौन सी खाद कितनी मात्र में दी जानी है। इस सिस्टम में शामिल होने के लिए किसानों को मोबाइल या एप के माध्यम से रजिस्ट्रेशन कराना होगा। अब ये होगा कि सोसाइटी से कोई भी व्यक्ति अब पहले की तरह खाद नहीं ले पाएगा। उसे ई उर्वरक सिस्टम का हिस्सा बनना होगा।






