छत्तीसगढ़

तिल्दा-नेवरा में स्टील प्लांट का विरोध तेज: पर्यावरण जनसुनवाई में ग्रामीणों का भारी हंगामा, अग्रसेन स्टील एंड पावर परियोजना पर उठे सवाल

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तिल्दा नेवरा। तिल्दा इलाके में गुरुवार को उस वक्त माहौल गरमा गया, जब देवरी-घुलघुल गांव में प्रस्तावित स्पंज और पावर प्लांट की जनसुनवाई में हजारों ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। महिलाओं ने मोर्चा संभाला, ग्रामीणों ने नारेबाजी की और साफ शब्दों में कह दिया कि, जान दे देंगे, लेकिन गांव में पावर प्लांट नहीं लगने देंगे। सबसे बड़ी बात जनसुनवाई में एक भी व्यक्ति कंपनी के समर्थन में सामने नहीं आया।

अग्रसेन स्टील एंड पावर की थी पर्यावरण जनसुनवाई
दरअसल मामला कुछ ऐसा है कि, तिल्दा- नेवरा के देवरी-घुलघुल गांव में प्रस्तावित अग्रसेन स्टील एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड की पर्यावरण जनसुनवाई भारी विरोध के बीच संपन्न हुई। जहां ग्रामीणों ने एकजुट होकर संयंत्र लगाने का खुलकर विरोध किया। गुरुवार सुबह से ही गांव के लोग परिवार सहित जनसुनवाई स्थल पहुंचने लगे थे।

इतने लोग पहुंचे कि, पंडाल छोटा पड़ गया
देखते ही देखते पंडाल ग्रामीणों से खचाखच भर गया। विरोध करने वालों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि, पंडाल छोटा पड़ गया। जैसे ही पर्यावरण विभाग के अधिकारियों ने परियोजना की जानकारी देना शुरू किया। ग्रामीणों ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी, महिलाओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा दिखाई दी और गांव के सरपंच ने सबसे पहले संयंत्र के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।

चारागाह की जमीन कुंपनी को आवंटित कर दिया गया
ग्रामीणों का कहना है कि, जिस जमीन पर प्लांट लगाया जाना प्रस्तावित है वहां पिछले करीब 60 वर्षों से गांव के मवेशी चरते आ रहे हैं, लेकिन अब उसी जमीन को कंपनी को आवंटित कर दिया गया है। जिसके बाद से गांव में लगातार विरोध हो रहा है।

कई गांवों के सरपंच पहुंचे
इतना ही नहीं, आस पास की कई ग्राम पंचायतों के सरपंच और पंच भी ग्रामीणों के समर्थन में उतर आए और जनसुनवाई में किसी ने भी प्लांट के पक्ष में बात नहीं रखी। ग्रामीणों का आरोप है कि, ग्राम पंचायत की ओर से कथित तौर पर अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया गया, लेकिन ग्रामसभा से उसका अनुमोदन नहीं कराया गया, जिससे लोगों में नाराजगी और बढ़ गई।

पहले भी दो बार स्थगित हो चुकी है जन सुनवाई
बता दें कि, तिल्दा के देवरी घुलघुल स्पंज पावर के द्वारा पहले भी दो बार पर्यावरण जनसुनवाई के लिए तारीख तय की गई  थी, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के चलते सुनवाई केंसल कर दी गई थी।

भारी पुलिस बल की रही तैनाती
आज ग्रामीणों के आक्रोश और स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात किया था। एडिशनल एसपी, डीएसपी वीरेंद्र चतुर्वेदी समेत कई थाना प्रभारियों की मौजूदगी में जनसुनवाई कराई गई। करीब एक घंटे तक सैकड़ों ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने अपनी आपत्तियां रखीं और आवेदन सौंपकर संयंत्र का विरोध दर्ज कराया।

स्वास्थ्य के साथ जमीन की उर्वर क्षमता भी जाएगी
ग्रामीणों का कहना है कि, फैक्ट्री लगने से खेती-किसानी प्रभावित होगी, जमीन की उर्वरक क्षमता खत्म होगी और पर्यावरण प्रदूषण के साथ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ेंगी। इसलिए वे किसी भी कीमत पर स्पंज और पावर प्लांट नहीं खुलने देंगे। ग्रामीणों की एकजुटता अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।

दलाल नुमा जनप्रतिनिधियों ने लिया ‘ठेका’
मजेदार बात तो यह है कि, जिन दलाल नुमा जनप्रतिनिधियों ने जनसुनवाई को सफल बनाने का ठेका लिया था जब उन लोगों ने ग्रामीणों का गुस्सा देखा तो वह पंडाल के पास आना छोड़ दूर से मोबाइल पर जानकारी लेते रहे। लेकिन जब उन्हें पता चला कि गांव वाले करने को तैयार नहीं है तो वह उल्टे पांव वापस लौट गए।

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