छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्मचारियों पर सख्ती: राजनीति और बाहरी पदों पर पूर्ण प्रतिबंध, उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई का अल्टीमेटम

Advertisement
छत्तीसगढ़ सरकार ने शासकीय कर्मचारियों को राजनीति और बिना अनुमति अन्य पदों पर सक्रियता से दूर रहने के सख्त निर्देश दिए हैं।

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने शासकीय कर्मचारियों को लेकर फिर सख्त रुख अपनाया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि, सरकारी सेवा में रहते हुए किसी भी प्रकार की राजनीतिक सक्रियता या बाहरी पदों पर बिना अनुमति भागीदारी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हाल ही में सामने आई शिकायतों के बाद जारी इस रिमाइंडर को प्रशासनिक अनुशासन और निष्पक्षता को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

शासकीय कर्मचारियों के लिए सख्त निर्देश
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी निर्देश में सभी विभागों, संभागायुक्तों, कलेक्टरों और विभागाध्यक्षों को सख्ती से नियमों का पालन सुनिश्चित कराने को कहा गया है। साथ ही राजस्व मंडल, बिलासपुर सहित राज्य के सभी शासकीय कार्यालयों को यह संदेश दिया गया है कि, अधिकारी और कर्मचारी अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी ईमानदारी, निष्ठा और निष्पक्षता के साथ करें। शासन ने दोहराया है कि, छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 का पालन प्रत्येक कर्मचारी के लिए अनिवार्य है।

राजनीतिक गतिविधियों पर पूरी तरह रोक
निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि, कोई भी शासकीय सेवक किसी राजनीतिक दल या संगठन का सदस्य नहीं बन सकता। इसके अलावा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी राजनीतिक गतिविधि में भाग लेना पूरी तरह प्रतिबंधित है।

बिना अनुमति अन्य पदों पर रोक
सरकार ने यह भी साफ किया है कि कोई भी कर्मचारी बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के किसी संस्था, समिति या संगठन में पद नहीं ले सकता। चाहे वह शासकीय हो या अशासकीय- बिना अनुमति की भागीदारी नियमों का उल्लंघन मानी जाएगी।

उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई
शासन ने चेतावनी दी है कि, नियमों का उल्लंघन करने वाले कर्मचारियों पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसमें निलंबन, वेतनवृद्धि रोकना या अन्य कठोर दंड शामिल हो सकते हैं।

सेवा में रहते हुए नेतागिरी नहीं चलेगी- सरकार 
GAD (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट) के इस रिमाइंडर को प्रशासनिक सख्ती के रूप में देखा जा रहा है। सरकार ने साफ संदेश दिया है कि, सेवा में रहते हुए ‘नेतागिरी’ अब किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होगी। यह पहल प्रशासनिक पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए अहम मानी जा रही है।

Advertisement
Advertisement

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button