रायगढ़

अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट की निःशुल्क “प्रयास” ग्रीष्मकालीन कक्षाएं संपन्न, 10 ग्रामों के 130+ विद्यार्थियों को मिला करियर मार्गदर्शन

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रायगढ़ :- परम पूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी के पावन आशीर्वाद एवं अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट के संस्थापक पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम जी के सतत् योगदान एवं स्नेहिल मार्गदर्शन में संचालित निःशुल्क ग्रीष्मकालीन शिक्षा कार्यक्रम प्रयास का आज गरिमामय वातावरण में सफल समापन हुआ। 1 मई से 13 जून तक ग्रीष्म कालीन निःशुल्क कोचिंग अभियान चला। बनोरा स्थित अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट द्वारा 01 मई 2026 से 13 जून 2026 तक चलाए गए इस कार्यक्रम में कक्षा 10वीं एवं 12वीं के विद्यार्थियों को भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान एवं गणित विषयों का गुणवत्तापूर्ण निःशुल्क अध्यापन कराया गया।

0 से अधिक ग्रामों के 130 से अधिक छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की। ग्रीष्मावकाश के दौरान गांव के बच्चों को शैक्षणिक माहौल देने की यह पहल अत्यंत सफल रही। विद्यार्थियों में अध्ययन रुचि, अनुशासन, आत्मविश्वास और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता का उल्लेखनीय विकास देखने को मिला। इस करियर मार्गदर्शन से बच्चों के भविष्य का रास्ता उज्जवल हुआ है। समापन दिवस पर प्रातः 7:00 से 9:30 बजे तक विशेष करियर मार्गदर्शन सत्र आयोजित किया गया।

सत्र में विद्यार्थियों को चिकित्सा, अभियांत्रिकी, प्रशासनिक सेवाएं, रक्षा सेवाओं सहित अन्य करियर विकल्पों की विस्तृत जानकारी दी गई। उन्हें लक्ष्य निर्धारित कर सतत परिश्रम करने हेतु प्रेरित किया गया। कार्यक्रम के सफल संचालन में शिक्षकों एवं स्वयंसेवकों ने सेवा भाव से योगदान दिया। अभिभावकों और क्षेत्रवासियों ने भी इस पहल की मुक्तकंठ से सराहना की और अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट के प्रति आभार जताया। पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम जी की मानना है कि शिक्षा ही समाज परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है । पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम जी के संकल्प के अनुसार ग्रामीण अंचल के प्रतिभावान विद्यार्थियों को उचित अवसर और मार्गदर्शन देना ट्रस्ट की प्राथमिकता है। भविष्य में भी ऐसे शैक्षणिक एवं सामाजिक कार्यक्रम निरंतर चलाए जाएंगे।

“प्रयास” ने एक बार फिर सिद्ध किया कि सकारात्मक सोच, सामाजिक सहयोग और समर्पित प्रयासों से ग्रामीण बच्चों के जीवन में सार्थक परिवर्तन लाया जा सकता है। अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट ने सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना करते हुए उन्हें अध्ययन, अनुशासन और संस्कारयुक्त जीवन की प्रेरणा दी। 

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