RBI का बड़ा फैसला: बैंकों के लिए 14 नए सख्त नियम, Bad Loan पर पहले से करनी होगी तैयारी

नई दिल्ली। Reserve Bank of India ने देश के बैंकिंग सिस्टम को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। RBI ने एसेट क्लासिफिकेशन और लोन प्रावधान (Provisioning) से जुड़े 14 नए नियम लागू करने की घोषणा की है। इन नियमों का असर इस बात पर पड़ेगा कि बैंक खराब ऋण (Bad Loans) की पहचान कैसे करेंगे और संभावित नुकसान के लिए कितनी पूंजी अलग रखेंगे।
पुराना मॉडल बदला, अब ECL सिस्टम लागू
अब तक बैंक Incurred Loss Model पर काम करते थे, जिसमें नुकसान होने के बाद प्रावधान किया जाता था। अब RBI ने Expected Credit Loss (ECL) मॉडल अपनाने के निर्देश दिए हैं।
इस नए मॉडल में बैंकों को पहले से संभावित जोखिम का आकलन करना होगा। यदि किसी लोन में डिफॉल्ट का खतरा नजर आता है, तो बैंक को पहले ही उसके लिए फंड अलग रखना पड़ेगा। इसे भविष्य आधारित (Forward Looking) व्यवस्था माना जा रहा है।
तीन स्टेज में बांटे जाएंगे लोन
नए नियमों के तहत जोखिम के आधार पर लोन को तीन श्रेणियों में रखा जाएगा—
स्टेज 1: कम जोखिम वाले लोन
- अगले 12 महीनों की डिफॉल्ट संभावना के आधार पर प्रावधान होगा।
स्टेज 2: बढ़ते जोखिम वाले लोन
- पूरे लोन अवधि के हिसाब से संभावित नुकसान आंका जाएगा।
स्टेज 3: खराब या डूबत खाते
- ऐसे लोन जो पूरी तरह क्रेडिट इम्पेयर्ड माने जाएंगे।
NPA की परिभाषा जस की तस
RBI ने स्पष्ट किया है कि NPA (Non-Performing Asset) की परिभाषा में कोई बदलाव नहीं होगा। यदि किसी लोन की किस्त 90 दिन तक जमा नहीं होती, तो उसे पहले की तरह NPA माना जाएगा।
कब से लागू होंगे नियम?
ये नए नियम अप्रैल 2027 से लागू होंगे। RBI ने बैंकों को तैयारी के लिए समय दिया है। इससे पहले मसौदा जारी कर बैंकों से सुझाव भी लिए गए थे।
क्या होगा फायदा?
विशेषज्ञों का मानना है कि इन नए नियमों से—
- बैंकिंग सिस्टम ज्यादा मजबूत होगा
- खराब लोन का खतरा पहले से पहचाना जाएगा
- आर्थिक संकट से निपटने की क्षमता बढ़ेगी
- निवेशकों और ग्राहकों का भरोसा मजबूत होगा
आम ग्राहकों पर क्या असर?
सामान्य ग्राहकों के लिए बैंकिंग सेवाएं जारी रहेंगी, लेकिन भविष्य में लोन मंजूरी प्रक्रिया और जोखिम जांच पहले से ज्यादा सख्त हो सकती है।






