छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ Coal Scam में नया मोड़: सूर्यकांत तिवारी के ड्राइवर नारायण साहू पर सप्लीमेंट्री चार्जशीट, 7.5 करोड़ कैश ट्रांजैक्शन का दावा


CG Coal Scam: छत्तीसगढ़ के चर्चित छत्तीसगढ़ कोल स्कैम (CG Coal Scam) मामले में ACB-EOW ने कारोबारी सूर्यकांत तिवारी के ड्राइवर नारायण साहू के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है।

रायपुर की विशेष अदालत में पेश किए गए इस चालान में जांच एजेंसी ने दावा किया है कि नारायण साहू अवैध कोल लेवी नेटवर्क का सक्रिय हिस्सा था। एजेंसी के अनुसार, वह कथित तौर पर कोयला कारोबारियों और ट्रांसपोर्टरों से कैश वसूली कर सिंडिकेट तक पहुंचाता था।
जांच में अब तक एक मूल और पांच पूरक चालान अदालत में पेश किए जा चुके हैं। नारायण साहू फिलहाल रायपुर सेंट्रल जेल में बंद है। इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर छत्तीसगढ़ कोल स्कैम (CG Coal Scam) राज्य की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। लोगों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि इतने बड़े नेटवर्क का संचालन लंबे समय तक कैसे होता रहा।
EOW की जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि नारायण साहू कथित तौर पर मुख्य आरोपी सूर्यकांत तिवारी के निर्देश पर अलग-अलग जिलों में कोयला कारोबारियों और ट्रांसपोर्टरों से अवैध वसूली करता था। जांच एजेंसी के मुताबिक, वसूली गई रकम को सूर्यकांत तिवारी के भाई रजनीकांत तिवारी तक पहुंचाया जाता था।
आरोप है कि कोल परिवहन और परमिट प्रक्रिया में शामिल लोगों पर दबाव बनाकर यह नेटवर्क पैसे वसूलता था। छत्तीसगढ़ के औद्योगिक क्षेत्रों में इस कार्रवाई के बाद कारोबारियों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है।
कई लोग मानते हैं कि इस तरह की अवैध वसूली से सरकारी राजस्व और व्यापारिक माहौल दोनों प्रभावित होते हैं। छत्तीसगढ़ कोल स्कैम अब सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का भी बड़ा मुद्दा बन चुका है।
जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि अवैध वसूली गई रकम में से करीब 7.5 करोड़ रुपए कैश कई अधिकारियों तक पहुंचाए गए। चार्जशीट में राज्य सेवा अधिकारी सौम्या चौरसिया और निलंबित IAS अधिकारी समीर विश्नोई का नाम भी सामने आया है।
EOW के अनुसार, इस मामले में डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग डिटेल और दस्तावेजी साक्ष्य जुटाए गए हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि पहले दाखिल किए गए अभियोग पत्रों के साथ अतिरिक्त साक्ष्य भी कोर्ट में प्रस्तुत किए गए हैं।
इस खुलासे के बाद सरकारी तंत्र की पारदर्शिता को लेकर बहस फिर तेज हो गई है। विपक्ष लगातार इस मामले को लेकर सवाल उठा रहा है, जबकि जांच एजेंसियां इसे राज्य के सबसे बड़े आर्थिक घोटालों में से एक मान रही हैं। छत्तीसगढ़ कोल स्कैम में कई बड़े नाम सामने आने के कारण लोगों की दिलचस्पी भी लगातार बनी हुई है।
प्रवर्तन निदेशालय यानी ED पहले ही दावा कर चुका है कि छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन और परमिट सिस्टम के जरिए 570 करोड़ रुपए से ज्यादा की अवैध वसूली की गई। जांच एजेंसी के मुताबिक, ऑनलाइन जारी होने वाले परमिट को कथित तौर पर ऑफलाइन किया जाता था और इसके बदले अवैध रकम ली जाती थी।
ED की रिपोर्ट के आधार पर ACB-EOW ने दो पूर्व मंत्रियों, कई विधायकों और अन्य लोगों समेत कुल 36 आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। जांच में यह भी दावा किया गया कि इस नेटवर्क के जरिए कोयला कारोबार से जुड़े कई लोगों से नियमित रूप से रकम वसूली जाती थी।
छत्तीसगढ़ कोल स्कैम का असर राज्य की राजनीति पर भी साफ दिखाई दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला प्रशासनिक निगरानी और भ्रष्टाचार नियंत्रण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है
इस मामले में पहले ही IAS रानू साहू, IAS समीर विश्नोई, सौम्या चौरसिया, जेडी माइनिंग एसएस नाग और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी समेत कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। अब नारायण साहू के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल होने के बाद जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
ACB-EOW ने संकेत दिए हैं कि अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की भी जांच जारी है। राज्य में इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार जारी है और आम लोग भी जांच की अगली कार्रवाई पर नजर बनाए हुए हैं।
छत्तीसगढ़ कोल स्कैम आने वाले समय में और बड़े खुलासों का कारण बन सकता है। अदालत में पेश किए जा रहे नए साक्ष्य इस पूरे मामले को और गंभीर बना रहे हैं।
Q1. छत्तीसगढ़ कोल स्कैम क्या है?
यह कथित अवैध कोल लेवी वसूली से जुड़ा मामला है, जिसमें कोयला कारोबार और परिवहन के जरिए करोड़ों रुपए वसूले जाने का आरोप है।
Q2. नारायण साहू की भूमिका क्या बताई गई है?
जांच एजेंसी के मुताबिक, नारायण साहू कोयला कारोबारियों से कैश वसूली कर उसे मुख्य आरोपियों तक पहुंचाने का काम करता था।
Q3. इस मामले में कितने लोगों के खिलाफ FIR दर्ज हुई थी?
ACB-EOW ने ED की रिपोर्ट के आधार पर कुल 36 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की थी।