छत्तीसगढ़

बिलासपुर में बढ़ा मलेरिया का खतरा, 37 वर्षीय बैगा महिला की मौत; 40 से ज्यादा मरीज मिले

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मलेरिया से महिला की मौत की पुष्टि
बिलासपुर। जिले में मलेरिया का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। कोटा विकासखंड के औरापानी गांव निवासी 37 वर्षीय बैगा महिला रेखा बैगा की मलेरिया से मौत की स्वास्थ्य विभाग ने पुष्टि की है। जिले में अब तक 40 से अधिक मलेरिया मरीज सामने आ चुके हैं, जबकि वर्तमान में 18 मरीज एक्टिव बताए जा रहे हैं।

सिम्स में इलाज के दौरान तोड़ा दम
रेखा बैगा की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें पहले गनियार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया था। हालत गंभीर होने पर उन्हें सिम्स रेफर किया गया, जहां गुरुवार शाम उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग ने जांच के बाद मौत का कारण मलेरिया बताया है।

कोटा विधायक ने उठाए सवाल
मामले को लेकर कोटा विधानसभा क्षेत्र के विधायक अटल श्रीवास्तव ने स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में तत्काल मेडिकल टीम भेजने, व्यापक स्क्रीनिंग कराने, दवाओं का पर्याप्त वितरण सुनिश्चित करने और मलेरिया नियंत्रण अभियान को युद्ध स्तर पर चलाने की मांग की है।

17 वर्षीय छात्र की मौत पर भी मलेरिया की आशंका
सीपत क्षेत्र के ग्राम अदराली निवासी 17 वर्षीय दिनेश ओडे की मौत को लेकर भी मलेरिया की आशंका जताई जा रही है। परिजनों के अनुसार वह करीब एक सप्ताह से तेज बुखार से पीड़ित था। हालत बिगड़ने पर उसे सिम्स रेफर किया गया, लेकिन 29 जुलाई को अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई। परिजनों ने मेडिकल रिपोर्ट में पी. फाल्सीपेरम मलेरिया की पुष्टि होने का दावा किया है। हालांकि, सिम्स प्रबंधन के अनुसार छात्र को अस्पताल ब्रॉट डेड अवस्था में लाया गया था।

72 गांव संवेदनशील श्रेणी में
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कोटा ब्लॉक के 72 गांव मलेरिया प्रभावित या संवेदनशील श्रेणी में हैं। पिछले कुछ दिनों में यहां मरीजों की संख्या बढ़ी है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें पिछले करीब 10 दिनों से जंगल और दूरस्थ गांवों में शिविर लगाकर मलेरिया की जांच, दवा वितरण और जागरूकता अभियान चला रही हैं।

पिछले साल भी हुई थी मौतें
कोटा क्षेत्र में पिछले साल भी बहरीझिरिया, कारीमाटी समेत कई गांवों में मलेरिया का प्रकोप सामने आया था। उस दौरान मलेरिया से पांच लोगों की मौत होने की बात सामने आई थी। इस वर्ष बढ़ते मामलों को देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में निगरानी और रोकथाम अभियान को और मजबूत करने की जरूरत बताई जा रही है।

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