विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, स्कूल-हॉस्टल से लेकर कोचिंग सेंटर तक होगा सेफ्टी ऑडिट

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उच्च स्तरीय बैठक में अधिकारियों को दिए निर्देश, जर्जर भवनों की तत्काल पहचान कर कार्रवाई पर जोर
रायपुर। विद्यार्थियों और आम नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशभर में शैक्षणिक संस्थानों और विद्यार्थियों से जुड़े परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन की जिम्मेदारी केवल हादसा होने के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि संभावित खतरों को पहले ही पहचानकर उन्हें दूर करना भी है।
मुख्यमंत्री ने गुरुवार को मुख्यमंत्री निवास कार्यालय, रायपुर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी संभागायुक्तों, पुलिस महानिरीक्षकों, कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों और वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की।
हॉस्टल, पीजी और कोचिंग सेंटर का होगा निरीक्षण
मुख्यमंत्री ने सभी जिलों में हॉस्टल, पीजी, कोचिंग सेंटर, स्कूल और बड़े शैक्षणिक भवनों का तत्काल निरीक्षण कराने के निर्देश दिए। इन परिसरों में सुरक्षा मानकों की स्थिति जांचने के लिए सेफ्टी ऑडिट पर भी विशेष जोर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान यदि कहीं सुरक्षा संबंधी कमी सामने आती है तो उसे दूर करने के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की जाए और निर्धारित अवधि में सुधार कार्य पूरा कराया जाए।
कलेक्टर-एसपी को नियमित निगरानी की जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को अपने-अपने जिलों में सुरक्षा व्यवस्था की नियमित निगरानी करने को कहा। उन्होंने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि शासन के निर्देश केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका प्रभाव जमीन पर भी दिखाई दे।
जर्जर भवनों की होगी पहचान
मुख्यमंत्री ने स्कूलों, पुस्तकालयों, छात्रावासों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर मौजूद पुराने एवं जर्जर भवनों की वास्तविक स्थिति का आकलन कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन भवनों से जनहानि का खतरा हो सकता है, उन्हें चिन्हित कर आवश्यक कार्रवाई तत्काल की जानी चाहिए।
हादसे का इंतजार नहीं, पहले होगी जोखिम की पहचान
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि सुरक्षा व्यवस्था में केवल शिकायत या दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने की प्रवृत्ति को बदलने की जरूरत है। इसके बजाय नियमित निरीक्षण, सतत निगरानी और समय रहते सुधार की कार्यसंस्कृति विकसित की जाए।
उन्होंने विशेष रूप से बच्चों और विद्यार्थियों से जुड़े संस्थानों में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें संभावित जोखिमों की समय रहते पहचान हो और दुर्घटना की आशंका को पहले ही समाप्त किया जा सके।






