डॉ. मनीषा त्रिपाठी जी का शोध आलेख अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के 21 श्रेष्ठ आलेखों में चयनित, विज्ञान भवन में रायगढ़ को दिलाया विशिष्ट सम्मान

139 प्रतिभागियों के शोध आलेखों में चुने गए 21 श्रेष्ठ आलेखों में बनाई जगह, रायगढ़ की एकमात्र चयनित प्रतिभागी के रूप में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुएल उरांव जी की गरिमामयी उपस्थिति में प्रमाणपत्र एवं स्मृति चिह्न से हुईं सम्मानित।
रायगढ़ । रायगढ़ की शैक्षणिक और साहित्यिक प्रतिभा ने एक बार फिर राष्ट्रीय पटल पर अपनी विशिष्ट पहचान दर्ज कराई है। विश्व हिंदी परिषद द्वारा नई दिल्ली के प्रतिष्ठित विज्ञान भवन में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन में रायगढ़ की विदुषी एवं राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित डॉ. मनीषा त्रिपाठी जी ने अपनी उल्लेखनीय शोध उपलब्धि से जिले का मान बढ़ाया है। सम्मेलन में देशभर से प्रस्तुत 139 प्रतिभागियों के शोध आलेखों में से चयनित 21 श्रेष्ठ आलेखों में उनका शोध आलेख भी शामिल किया गया। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर के विद्वत मंच पर रायगढ़ की अकादमिक क्षमता और बौद्धिक समृद्धि का प्रभावशाली परिचय दिया।

139 प्रतिभागियों के बीच श्रेष्ठ शोध आलेखों में बनाई जगह
विश्व हिंदी परिषद के तत्वावधान में 30 एवं 31 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में हिंदी भाषा, साहित्य, शोध और वैश्विक परिप्रेक्ष्य में हिंदी की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विमर्श हुआ। सम्मेलन के अंतर्गत आयोजित शोध संगोष्ठी एवं शोध आलेख वाचन सत्र में देश के विभिन्न क्षेत्रों से 139 प्रतिभागियों ने अपने शोध आलेख प्रस्तुत किए। इनमें से विषयवस्तु एवं शोध की गुणवत्ता के आधार पर 21 श्रेष्ठ आलेखों का चयन किया गया।
इस प्रतिष्ठित चयन सूची में डॉ. मनीषा त्रिपाठी जी के शोध आलेख को स्थान मिलना रायगढ़ के लिए विशेष गौरव का विषय रहा। रायगढ़ से इस श्रेणी में चयनित होने वाली वे एकमात्र प्रतिभागी रहीं। सीमित चयन और देशभर के प्रतिभागियों के बीच मिली यह उपलब्धि उनके निरंतर अध्ययन, शोध के प्रति गंभीरता और हिंदी भाषा-साहित्य के क्षेत्र में उनकी अकादमिक सक्रियता को रेखांकित करती है।

विद्वतजनों ने की शोध की सराहना, तालियों से गूंजा सभागार
शोध संगोष्ठी में देश-विदेश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, साहित्यकारों और विद्वानों की उपस्थिति रही। इनमें विश्व हिंदी परिषद के केंद्रीय समन्वयक एवं भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के सदस्य डॉ. श्रवण कुमार जी, परिषद के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. विपिन कुमार जी, विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री विनोद बंसल जी, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष एवं जनसंपर्क निदेशक प्रो. महा सिंह पूनिया जी, श्रीलंका के हिंदी संस्थान एवं स्वामी विवेकानंद केंद्र, कोलंबो की संस्थापक-निदेशक श्रीमती अथिला कोटवाल जी तथा बिहार विधान परिषद के सदस्य एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री संजय पासवान जी सहित अनेक गणमान्य व्यक्तित्व शामिल रहे।
शोध आलेख की प्रस्तुति के बाद उपस्थित विद्वतजनों ने उसकी विषयवस्तु और प्रस्तुतीकरण की सराहना की। इस दौरान सभागार तालियों की गूंज से मुखरित हो उठा। प्रतिष्ठित विद्वानों से मिली सराहना ने डॉ. मनीषा त्रिपाठी जी की इस उपलब्धि को और भी खास बना दिया।

केंद्रीय मंत्री श्री जुएल उरांव जी की उपस्थिति में मिला सम्मान
सम्मेलन के सम्मान समारोह में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुएल उरांव जी, आईएएस डॉ. अशोक कुमार भार्गव जी तथा राष्ट्रीय तकनीकी प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केंद्र के प्रोफेसर एवं वैज्ञानिक डॉ. पी.के. पुरोहित जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। इसी अवसर पर डॉ. मनीषा त्रिपाठी जी को चयनित श्रेष्ठ शोध आलेख के लिए प्रमाणपत्र एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। अतिथियों ने उनके शोध कार्य की सराहना करते हुए आगामी शैक्षणिक एवं साहित्यिक यात्रा के लिए शुभकामनाएं भी दीं।

रायगढ़ में हर्ष, विभिन्न संगठनों और शुभचिंतकों ने दी बधाई
विज्ञान भवन के प्रतिष्ठित मंच पर मिली इस उपलब्धि से रायगढ़ के शैक्षणिक, साहित्यिक एवं सामाजिक क्षेत्र में प्रसन्नता है। डॉ. मनीषा त्रिपाठी जी को उनके मित्रों, शुभचिंतकों, विश्व ब्राह्मण महासंघ तथा कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

139 प्रतिभागियों के शोध आलेखों में से चुने गए 21 श्रेष्ठ आलेखों में रायगढ़ की डॉ. मनीषा त्रिपाठी जी के शोध कार्य को स्थान मिलना केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि जिले की शैक्षणिक और साहित्यिक पहचान के लिए भी गौरवपूर्ण क्षण है। विज्ञान भवन में मिला यह सम्मान उनकी शोध साधना को नई प्रतिष्ठा देने के साथ ही रायगढ़ की प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आया है।






