छत्तीसगढ़

इको टूरिज्म को मिली नई रफ्तार, बालोद के मां सियादेवी जलाशय में शुरू हुई बम्बू राफ्टिंग, रोमांच और सुकून का अनोखा संगम

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नए साल पर बालोद जिले के मां सियादेवी जलाशय में शुरू हुई बम्बू राफ्टिंग से इको टूरिज्म को बढ़ावा मिला है। यह पहल स्थानीय युवाओं को रोजगार दे रही है और पर्यावरण अनुकूल पर्यटन के जरिए जिले के प्राकृतिक सौंदर्य को नई पहचान दिला रही है।

नए साल के मौके पर बालोद जिले में इको टूरिज्म को नया उड़ान मिली है। प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां सियादेवी के समीप बने जलाशय में अब बम्बू राफ्टिंग की शुरुआत हो चुकी है। यह पहल न केवल स्थानीय रोजगार को बढ़ावा दे रही है, बल्कि बालोद के छिपे प्राकृतिक सौंदर्य को भी दुनिया के सामने ला रही है।

छत्तीसगढ़ में बम्बू राफ्टिंग की शुरुआत के बाद यह थीम अब बालोद तक पहुंच गई है। दशकों से उपेक्षित रहा यह जलाशय अब स्थानीय पंचायत और प्रशासन के सहयोग से एक आकर्षक पर्यटन केंद्र बन गया है। मां सियादेवी के आंचल में स्थित यह जगह हर ओर से प्रकृति के सानिध्य का अहसास कराती है।

इस पहल की नींव गांव के युवा उप सरपंच जगन्नाथ साहू ने रखी, जिन्होंने बताया कि उद्देश्य स्थानीय युवाओं को रोजगार देना और क्षेत्रीय पर्यटन को नई दिशा देना है। बम्बू से बनी नौकाओं का संचालन भी गांव के ही युवक कर रहे हैं। हर व्यक्ति महज 50 रुपये में इस राफ्टिंग का आनंद ले सकता है।

पर्यटकों में भी इस जगह को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। किसी ने इसे अनूठा अनुभव बताया तो किसी ने कहा कि यह जगह अब छत्तीसगढ़ के नक्शे पर नई पहचान बनाएगी।स्थानीय प्रशासन और पंचायत ने इस स्थान को प्राकृतिक और पर्यावरण अनुकूल पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है। यहां प्लास्टिक पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है और खाने-पीने के लिए पत्तों व दोने-पत्तल जैसे जैविक विकल्पों का प्रयोग किया जा रहा है।

बालोद में शुरू हुई यह बम्बू राफ्टिंग न सिर्फ एक नया एडवेंचर लाया है, बल्कि इसने साबित किया है कि यदि स्थानीय लोग ठान लें तो हर जगह पर्यटन का केंद्र बन सकती है। मां सियादेवी जलाशय अब बालोद का नया आकर्षण बन चुका है।

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