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भारत-फिनलैंड ने कानून, कूटनीति और संवाद के माध्यम से शांति स्थापना पर जोर दिया, रणनीतिक साझेदारी को दी नई दिशा

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संघर्षों के बीच दोनों देशों ने सैन्य समाधान को खारिज कर कूटनीतिक मार्ग को अपनाने का आह्वान

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया और यूक्रेन में जारी संघर्षों के बीच भारत और फिनलैंड ने स्पष्ट किया कि केवल सैन्य टकराव से किसी भी समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। भारत दौरे पर आए फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद संयुक्त प्रेस वक्तव्य में कहा कि दोनों देशों ने विवादों के समाधान के लिए कानून के शासन, बातचीत और कूटनीति में विश्वास रखने का संकल्प लिया है।


भारत और फिनलैंड ने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि दोनों देशों ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए तीन समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने कहा कि इस साझेदारी के तहत डिजिटलाइजेशन, सतत विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), 6जी दूरसंचार, स्वच्छ ऊर्जा, क्वांटम कंप्यूटिंग, रक्षा, अंतरिक्ष, सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्रों में सहयोग को नई गति मिलेगी।


ऐतिहासिक और तकनीकी सहयोग की झलक

प्रधानमंत्री मोदी ने फिनलैंड के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि नोकिया के मोबाइल नेटवर्क ने करोड़ों भारतीयों को जोड़ने में भूमिका निभाई, चिनाब नदी पर विश्व का सबसे ऊंचा रेलवे पुल फिनलैंड की वास्तुकला सहयोग से बना, और असम के नुमालीगढ़ में दुनिया की सबसे बड़ी बांस आधारित जैव-एथेनॉल रिफाइनरी स्थापित हुई।


शिक्षा, नवाचार और शोध में सहयोग को और मजबूत बनाने का निर्णय

दोनों देशों ने माइग्रेशन और मोबिलिटी एग्रीमेंट पर सहमति जताई, जिससे छात्रों, शोधकर्ताओं और पेशेवरों के बीच आवागमन बढ़ेगा। शिक्षक प्रशिक्षण, स्कूल-से-स्कूल साझेदारी और स्टार्टअप सहयोग के माध्यम से नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाएगा।


वैश्विक स्थिरता और सतत विकास में सहयोग

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और फिनलैंड वैश्विक स्थिरता, साझा समृद्धि और भरोसेमंद प्रौद्योगिकी उपलब्ध कराने में सहयोग करेंगे। दोनों देशों ने ‘वर्ल्ड सर्कुलर इकॉनमी फोरम’ की मेजबानी का ऐलान किया और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार और आतंकवाद के खिलाफ साझा प्रतिबद्धता जताई।

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