इजरायल–ईरान युद्ध का असर: दुबई में भारी डिस्काउंट पर बिक रहा सोना

फ्लाइट्स प्रभावित और बुलियन सप्लाई में बाधा, ग्लोबल कीमत से 30 डॉलर प्रति औंस तक सस्ता हुआ गोल्ड
दुबई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और Israel–Iran conflict के कारण अंतरराष्ट्रीय गोल्ड मार्केट में हलचल तेज हो गई है। युद्ध की स्थिति का असर अब सोने के व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है। सप्लाई चेन प्रभावित होने के कारण Dubai में सोना ग्लोबल कीमत के मुकाबले भारी डिस्काउंट पर बिक रहा है।
जानकारी के मुताबिक, फ्लाइट्स प्रभावित होने और लॉजिस्टिक दिक्कतों की वजह से ट्रेडर्स के लिए दुबई के ट्रेडिंग हब से बुलियन ट्रांसपोर्ट करना मुश्किल हो गया है। इसके चलते व्यापारियों को बिक्री बढ़ाने के लिए कीमतों में छूट देनी पड़ रही है।
ग्लोबल कीमत से 30 डॉलर प्रति औंस तक सस्ता मिल रहा सोना
8 मार्च की सुबह दुबई में सोने की कीमत करीब 5,173.73 डॉलर (लगभग 4,75,675 रुपये) प्रति औंस दर्ज की गई। एक औंस में लगभग 28.34 ग्राम सोना होता है।
हालांकि मौजूदा परिस्थितियों में ट्रेडर्स ग्लोबल बेंचमार्क कीमत के मुकाबले करीब 30 डॉलर प्रति औंस (करीब 2,758 रुपये) तक का डिस्काउंट दे रहे हैं।
शिपिंग और इंश्योरेंस लागत बढ़ने से नए ऑर्डर में गिरावट
युद्ध की स्थिति के कारण शिपिंग और इंश्योरेंस का खर्च भी बढ़ गया है। इसके साथ ही समय पर डिलीवरी को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
इसी वजह से कई खरीदार फिलहाल नए ऑर्डर देने से हिचकिचा रहे हैं। भारी स्टोरेज और फाइनेंसिंग लागत से बचने के लिए व्यापारी सोने को डिस्काउंट पर बेचने की रणनीति अपना रहे हैं।
एशिया के लिए गोल्ड ट्रेडिंग का बड़ा केंद्र है दुबई
United Arab Emirates, खासकर दुबई, एशिया के लिए सोना रिफाइनिंग और एक्सपोर्ट का एक बड़ा केंद्र माना जाता है। यहां से सोना Switzerland, United Kingdom और कई अफ्रीकी देशों से ट्रांजिट होकर एशियाई बाजारों तक पहुंचता है।
लेकिन मौजूदा संघर्ष के कारण ईरानी मिसाइल हमलों के खतरे से दुबई के एयरस्पेस के कुछ हिस्सों में प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिससे सोने की शिपमेंट में देरी हो रही है।
भारत में भी पड़ सकता है असर
इस स्थिति का असर भारत पर भी देखने को मिल सकता है। कई कार्गो शिपमेंट में देरी के कारण देश में फिजिकल बुलियन की उपलब्धता पर अल्पकालिक असर पड़ा है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल भारत में मांग अपेक्षाकृत कम है और जनवरी में ज्यादा इंपोर्ट होने के कारण बाजार में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।






