छत्तीसगढ़

बस्तर की बेटी अपूर्वा त्रिपाठी को मिला “स्पाइस आइकन 2026” सम्मान, देशभर में जैविक खेती मॉडल की चर्चा

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नई दिल्ली स्थित पूसा के आईसीएआर परिसर के एनएएससी कॉम्प्लेक्स में आयोजित “MIONP 2.0 – मेक इंडिया ऑर्गेनिक, नेचुरल एंड प्रॉफिटेबल” सम्मेलन में बस्तर की बेटी अपूर्वा त्रिपाठी को वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित “स्पाइस आइकन” सम्मान प्रदान किया गया। इस उपलब्धि से छत्तीसगढ़ में गर्व का माहौल है।

जैविक खेती में नवाचार के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान
अपूर्वा त्रिपाठी को “स्पाइस कल्टीवेशन एक्सीलेंस” श्रेणी में यह सम्मान उनके जैविक खेती में नवाचार, नेतृत्व क्षमता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाले कार्यों के लिए दिया गया। 16-17 अप्रैल को आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर के किसान, एफपीओ, एग्री-स्टार्टअप, वैज्ञानिक और नीति-निर्माता शामिल हुए।

कार्यक्रम में गुजरात नेचुरल फार्मिंग साइंस यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. सी. के. टिम्बाडिया सहित कई विशेषज्ञों ने उन्हें सम्मानित किया।

सम्मान बस्तर की महिलाओं और परंपरागत ज्ञान को समर्पित
अपूर्वा त्रिपाठी ने इस उपलब्धि को अपनी जन्मभूमि बस्तर, आदिवासी महिलाओं और “मां दंतेश्वरी हर्बल समूह” को समर्पित किया। उन्होंने अपने परिवार और मार्गदर्शकों के सहयोग को अपनी सफलता का आधार बताया।

मां दंतेश्वरी हर्बल समूह बना राष्ट्रीय मॉडल
इस समूह ने जैविक कृषि मॉडल के जरिए सैकड़ों आदिवासी महिलाओं को उत्पादन, प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग से जोड़ा है। इसके माध्यम से मसाले, मिलेट्स और वन उत्पादों को “एमडी बोटैनिकल्स” ब्रांड के तहत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया गया है।

नई किस्म “MDBP-16” और नेचुरल ग्रीनहाउस बनी खास पहचान
समूह द्वारा विकसित काली मिर्च की नई किस्म “मां दंतेश्वरी ब्लैक पेपर-16 (MDBP-16)” को भारत सरकार द्वारा पंजीकृत किया गया है। यह प्रजाति अधिक उत्पादन देने के साथ कम पानी में भी खेती के लिए उपयुक्त है।

साथ ही “नेचुरल ग्रीनहाउस” तकनीक ने खेती की लागत को कम कर किसानों को बड़ा लाभ पहुंचाया है। जहां पारंपरिक पॉलीहाउस महंगा होता है, वहीं यह मॉडल बेहद कम लागत में पर्यावरण के अनुकूल समाधान प्रदान करता है।

प्रदेशभर में खुशी की लहर
अपूर्वा त्रिपाठी की इस उपलब्धि पर कृषि विशेषज्ञों, समूह सदस्यों और क्षेत्रवासियों ने खुशी जताई है। यह सम्मान न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि बस्तर की जैविक खेती और महिला सशक्तिकरण मॉडल को राष्ट्रीय पहचान भी दिलाता है।

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