छत्तीसगढ़

CG High Court Virat Kidnapping Case: विराट अपहरण केस में हाईकोर्ट सख्त, खारिज की अपील, बड़ी मां समेत 5 आरोपियों की उम्रकैद बरकरार

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CG High Court Virat Kidnapping Case: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में चर्चित विराट अपहरण कांड में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। Chhattisgarh High Court की डिवीजन बेंच ने सभी पांच आरोपियों की अपील खारिज करते हुए उनकी उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है।

CG High Court Virat Kidnapping Case: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में चर्चित विराट अपहरण कांड में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। Chhattisgarh High Court की डिवीजन बेंच ने सभी पांच आरोपियों की अपील खारिज करते हुए उनकी उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है। कोर्ट ने साफ कहा कि मासूम बच्चों का फिरौती के लिए अपहरण समाज में डर और असुरक्षा का माहौल पैदा करता है, ऐसे अपराधों में राहत नहीं दी जा सकती।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि मामले में अपराध की कड़ियां पूरी तरह जुड़ी हुई हैं और आरोपियों के खिलाफ सबूत मजबूत हैं।

2019 में हुआ था 6 साल के विराट का अपहरण

20 अप्रैल 2019 की शाम 6 साल का विराट सराफ अपने घर के बाहर दोस्तों के साथ खेल रहा था। तभी बिना नंबर की सफेद वैगन-आर में पहुंचे बदमाशों ने उसे जबरन कार में बैठाकर अगवा कर लिया। इसके बाद बच्चे को एक सुनसान मकान में बंधक बनाकर रखा गया। अपहरण के अगले दिन विराट के पिता और कारोबारी विवेक सराफ के पास फोन आया। आरोपियों ने बच्चे को सुरक्षित छोड़ने के बदले 6 करोड़ रुपए की फिरौती मांगी और जान से मारने की धमकी दी।

पुलिस ने 7वें दिन सुरक्षित छुड़ाया

मामले के बाद पुलिस की कई टीमें लगातार छह दिनों तक आरोपियों की तलाश में जुटीं रहीं। कॉल डिटेल और सर्विलांस की मदद से पुलिस 26 अप्रैल 2019 को जरहाभाठा इलाके के एक मकान तक पहुंची, जहां से मासूम विराट को सुरक्षित बरामद कर लिया गया। मौके से एक आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया था।

बड़ी मां निकली साजिश की मास्टरमाइंड

जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि इस पूरे अपहरण कांड की साजिश विराट की बड़ी मां नीता सराफ ने ही रची थी। पुलिस के मुताबिक वह भारी कर्ज में डूबी हुई थी और पैसों के लालच में उसने अपने साथियों के साथ मिलकर अपहरण की योजना बनाई थी। इतना ही नहीं, अपहरण के बाद वह रोज पीड़ित परिवार के घर पहुंचती थी और पुलिस की हर गतिविधि की जानकारी अपने साथियों तक पहुंचाती थी, ताकि जांच से बचा जा सके। हाईकोर्ट ने मामले को बेहद गंभीर मानते हुए कहा कि ऐसे अपराधों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है, ताकि समाज में कानून का डर बना रहे।

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