रायगढ़

रायगढ़ में राधाष्टमी पर गूंजा हरिनाम संकीर्तन, राधा-माधव के महाअभिषेक में जुटे श्रद्धालु

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इस्कॉन प्रचार केंद्र के आयोजन में करीब 500 भक्त हुए शामिल, कथा, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और 56 भोग के बाद हुआ महाप्रसाद वितरण

रायगढ़, 20 सितंबर। राधाष्टमी के अवसर पर रायगढ़ में भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का माहौल देखने को मिला। चैतन्य नगर कॉलोनी स्थित क्लब हाउस में इस्कॉन प्रचार केंद्र रायगढ़ की ओर से राधाष्टमी महोत्सव आयोजित किया गया, जिसमें करीब 500 श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक चले कार्यक्रम में हरिनाम संकीर्तन, श्री राधा रानी की कथा, बच्चों की प्रस्तुतियां, राधा-माधव का महाअभिषेक, 56 भोग, आरती और महाप्रसाद समेत कई धार्मिक कार्यक्रम हुए।

मृदंग-करताल की धुन पर हुआ हरिनाम संकीर्तन

कार्यक्रम की शुरुआत हरिनाम संकीर्तन से हुई। मृदंग और करताल की धुन के बीच श्रद्धालुओं ने हरे कृष्ण महामंत्र का संकीर्तन किया। पूरे परिसर में राधा-माधव के जयकारे गूंजते रहे और श्रद्धालु कीर्तन में शामिल होते नजर आए।

इसके बाद इस्कॉन रायपुर के मुख्य पुजारी एवं इस्कॉन प्रचार केंद्र रायगढ़ के प्रभारी मिथिलापति प्रभुजी ने श्री राधा रानी की महिमा और राधाष्टमी के आध्यात्मिक महत्व पर कथा प्रस्तुत की।

कथा में बताया राधा-कृष्ण के दिव्य संबंध का महत्व

मिथिलापति प्रभुजी ने कथा के दौरान श्री राधा रानी के स्वरूप, भगवान श्रीकृष्ण के साथ उनके दिव्य संबंध और कृष्ण भक्ति में राधा रानी के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। श्रद्धालुओं ने पूरे मनोयोग से कथा का श्रवण किया।

बच्चों की प्रस्तुतियों ने बढ़ाया आयोजन का आकर्षण

महोत्सव के दौरान बच्चों ने राधा-कृष्ण की भक्ति पर आधारित गायन और नृत्य की प्रस्तुतियां दीं। बच्चों की इन प्रस्तुतियों को श्रद्धालुओं ने तालियों के साथ सराहा। आयोजन में बच्चों और युवाओं की सहभागिता भी विशेष रूप से दिखाई दी।

वैदिक मंत्रों के बीच हुआ राधा-माधव का महाअभिषेक

महोत्सव का मुख्य आकर्षण राधा-माधव का महाअभिषेक रहा। वैदिक मंत्रोच्चार और हरिनाम संकीर्तन के बीच श्रद्धालुओं ने अभिषेक कार्यक्रम में भाग लिया। इसके बाद भगवान को 56 भोग अर्पित किए गए।

आरती के बाद दोबारा हरिनाम संकीर्तन हुआ। कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद की व्यवस्था की गई, जिसमें करीब 500 लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।

जन्माष्टमी के बाद राधाष्टमी में भी दिखी श्रद्धालुओं की भागीदारी

इस्कॉन प्रचार केंद्र रायगढ़ के आयोजनों में श्रद्धालुओं की सहभागिता लगातार देखने को मिल रही है। इससे पहले केंद्र की ओर से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का तीन दिवसीय महामहोत्सव आयोजित किया गया था। इसके बाद राधाष्टमी कार्यक्रम में भी बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रही।

‘राधा रानी की कृपा से कृष्ण भक्ति की प्राप्ति’ : मिथिलापति

महोत्सव के दौरान मिथिलापति प्रभुजी ने कहा कि श्री राधा रानी को भगवान श्रीकृष्ण की आह्लादिनी शक्ति माना जाता है और राधा-कृष्ण का संबंध दिव्य प्रेम एवं भक्ति का स्वरूप है। उनके अनुसार राधा रानी की कृपा को कृष्ण भक्ति के मार्ग में महत्वपूर्ण माना गया है।

उन्होंने कहा कि इस्कॉन के धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य लोगों को हरिनाम संकीर्तन और राधा-कृष्ण की भक्ति से जोड़ना है। बच्चों और युवाओं की भागीदारी के माध्यम से आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास भी किया जा रहा है।

कार्तिक माह में घर-घर होगा दीपदान

इस्कॉन प्रचार केंद्र रायगढ़ की ओर से बताया गया कि राजा पारा स्थित पल्लवी महल में प्रत्येक रविवार श्रीमद्भागवत कथा, हरिनाम संकीर्तन और महाप्रसाद का आयोजन किया जाता है।

कार्तिक माह को संस्था द्वारा दामोदर माह के रूप में मनाया जाता है। इस दौरान आमंत्रण मिलने पर संस्था के सदस्य श्रद्धालुओं के घर जाकर दीपदान, हरिनाम संकीर्तन और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हैं। आयोजन के दौरान दामोदर अष्टकम का गायन भी किया जाता है।

चार साल से रायगढ़ में सक्रिय है प्रचार केंद्र

इस्कॉन यानी इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस हरे कृष्ण आंदोलन के माध्यम से भक्ति योग और कृष्ण भावनामृत के प्रचार-प्रसार से जुड़ी संस्था है। रायगढ़ में राजा महल के सामने पल्लवी महल में प्रचार केंद्र करीब चार वर्षों से संचालित होने की जानकारी दी गई है।

केंद्र में भजन-कीर्तन, नाम संकीर्तन, प्रवचन और वैदिक ग्रंथों पर आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यहां भगवद्गीता सहित अन्य वैदिक साहित्य की शिक्षाओं पर चर्चा के साथ प्रसाद और धार्मिक साहित्य का वितरण भी किया जाता है।

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