Bastar Dussehra 2026: 600 साल पुरानी रथ परिक्रमा की परंपरा शुरू, 75 दिनों तक चलेगा ऐतिहासिक पर्व

Bastar Dussehra Rath Parikrama: छत्तीसगढ़ के बस्तर में विश्वप्रसिद्ध दशहरा पर्व की तैयारियां तेज हो गई हैं। मां दंतेश्वरी के छत्र और डोली की रथ परिक्रमा के लिए विशालकाय रथ का निर्माण शुरू हो गया है। इस ऐतिहासिक परंपरा में 400 से अधिक आदिवासी रथ खींचने में सहभागी बनते हैं।
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर में विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व की शुरुआत हो चुकी है। लगभग 75 दिनों तक चलने वाले इस अनूठे उत्सव की सबसे प्रमुख परंपराओं में रथ परिक्रमा का विशेष स्थान है। विजयादशमी के दिन मां दंतेश्वरी के छत्र और डोली को रथ पर विराजित कर शहर की परिक्रमा कराई जाती है। इस परंपरा को निभाने के लिए विशाल रथ के निर्माण की तैयारियां शुरू हो गई हैं।
Bastar Dussehra Rath: 30 फीट ऊंचे रथ को खींचने जुटते हैं सैकड़ों आदिवासी
बस्तर दशहरा में रथ परिक्रमा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और सदियों पुरानी परंपराओं का प्रतीक है। लगभग 30 फीट ऊंचे विशाल रथ को परिक्रमा कराने के लिए 400 से अधिक आदिवासियों की जरूरत पड़ती है। इस अनूठे आयोजन को देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक बस्तर पहुंचते हैं।
600 वर्षों से चली आ रही रथ निर्माण की परंपरा
बस्तर दशहरा में रथ निर्माण की प्रक्रिया भी अपने आप में खास है। परंपरा के अनुसार, रथ बनाने के लिए सरई की लकड़ियों का उपयोग किया जाता है। इन लकड़ियों को लाने की जिम्मेदारी स्थानीय समुदाय के विशेष वर्ग के लोगों की होती है। रथ निर्माण से पहले लकड़ियों की विधिवत पूजा-अर्चना भी की जाती है।
बड़ेउमर और झाड़उमर के ग्रामीण बनाते हैं विशाल रथ
परंपरा के मुताबिक, बस्तर जिले के बड़ेउमर और झाड़उमर गांवों के आदिवासी ग्रामीण रथ निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं। 100 से अधिक ग्रामीण कारीगर सीरासार भवन में रहकर लगभग 15 दिनों के भीतर इस विशालकाय रथ को तैयार करते हैं।
विजयादशमी के दिन इसी रथ पर मां दंतेश्वरी के छत्र और डोली को विराजित कर शहर की परिक्रमा कराई जाती है। बस्तर दशहरा की यह परंपरा क्षेत्र की आस्था, सामुदायिक सहभागिता और सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाती आ रही है।






