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CG Police Recruitment : गर्भवती महिला अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, फिजिकल टेस्ट मामले में फिर होगी सुनवाई

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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पूर्व आदेश लिया वापस, मेरिट के आधार पर दोबारा होगी सुनवाई

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस भर्ती प्रक्रिया में गर्भावस्था के कारण शारीरिक दक्षता परीक्षा (Physical Proficiency Test) में शामिल नहीं हो सकीं महिला अभ्यर्थियों को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने अपने पूर्व आदेश को वापस लेते हुए संबंधित याचिकाओं को पुनः बहाल कर मेरिट के आधार पर सुनवाई के लिए संबंधित पीठ के समक्ष भेजने का निर्देश दिया है।

पूर्व आदेश वापस, याचिकाएं फिर से बहाल

जस्टिस ए.के. प्रसाद की एकलपीठ ने कहा कि लंबी भर्ती प्रक्रिया के दौरान गर्भवती हुई महिला अभ्यर्थियों को शारीरिक दक्षता परीक्षा स्थगित करने का अधिकार है या नहीं, इस महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न पर पहले कोई स्पष्ट न्यायिक निर्णय नहीं हुआ था। इसलिए पूर्व आदेश में इस मुद्दे को पहले से तय मानकर याचिका खारिज करना रिकॉर्ड पर स्पष्ट त्रुटि थी।

2018 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा मामला

वर्ष 2018 में छत्तीसगढ़ पुलिस में सूबेदार, उप निरीक्षक (SI) और प्लाटून कमांडर सहित विभिन्न पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी। लिखित परीक्षा में सफल होने के बाद कई महिला अभ्यर्थी शारीरिक दक्षता परीक्षा से पहले गर्भवती हो गईं।

अभ्यर्थियों का कहना था कि भर्ती प्रक्रिया में हुई असामान्य देरी के कारण वे गर्भवती हुईं, इसलिए उन्हें प्रसव के बाद निर्धारित अवधि में शारीरिक दक्षता परीक्षा देने का अवसर दिया जाना चाहिए।

रिव्यू पिटीशन पर कोर्ट की अहम टिप्पणी

हाईकोर्ट ने 16 जनवरी 2026 को पहले इन याचिकाओं को खारिज कर दिया था। इसके बाद रोशनी केरकेट्टा सहित अन्य अभ्यर्थियों ने पुनर्विचार याचिका (Review Petition) दायर की।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि जिस पुराने फैसले का हवाला देकर याचिकाएं खारिज की गई थीं, उसमें गर्भावस्था के कारण फिजिकल टेस्ट स्थगित करने के प्रश्न पर कोई स्पष्ट निर्णय नहीं दिया गया था। केवल किसी पक्ष की दलील का उल्लेख कर देना किसी मुद्दे पर न्यायिक निर्णय नहीं माना जा सकता।

मेरिट के आधार पर होगी आगे की सुनवाई

हाईकोर्ट ने 16 जनवरी 2026 का अपना आदेश वापस लेते हुए रोशनी केरकेट्टा सहित सभी संबंधित याचिकाओं को मूल क्रमांक पर बहाल कर दिया है। अब इन मामलों की सुनवाई मेरिट के आधार पर संबंधित बेंच के समक्ष की जाएगी।

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