महानदी संरक्षण : चंद्रपुर, सक्ती और शिवरीनारायण में एसटीपी निर्माण अटका, नालों का गंदा पानी अब भी नदी में जा रहा

रायगढ़। नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देश पर प्रदेश में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) निर्माण की योजना बनाई गई थी, लेकिन महानदी को प्रदूषण से बचाने की दिशा में अब भी कई परियोजनाएं लंबित हैं।
तीन प्रमुख स्थानों पर टेंडर प्रक्रिया अटकी
महानदी में दूषित पानी जाने से रोकने के लिए चंद्रपुर, सक्ती और शिवरीनारायण में एसटीपी का निर्माण प्रस्तावित है, लेकिन लंबे समय से टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। कई बार निविदा जारी होने के बावजूद ठेकेदारों ने रुचि नहीं दिखाई।
सक्ती में 8 अप्रैल 2026 को पांचवीं बार टेंडर जारी किया गया, जबकि चंद्रपुर और शिवरीनारायण में 15 दिसंबर 2025 को चौथी बार निविदा निकाली गई थी। इसके बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।
शहरों का गंदा पानी बना नदी प्रदूषण की बड़ी वजह
शहरों से निकलने वाला सीवरेज पानी नालों और नालियों के माध्यम से सीधे नदियों में पहुंच रहा है। इससे नदियों के प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। देश के प्रदूषित नदीखंडों की रिपोर्ट के बाद एसटीपी निर्माण को जरूरी कदम माना गया था।
रायगढ़ में बने दो एसटीपी
रायगढ़ नगर निगम ने केलो नदी को प्रदूषण मुक्त करने के उद्देश्य से दो एसटीपी का निर्माण कराया है। इनमें 25 एमएलडी और 7 एमएलडी क्षमता के प्लांट शामिल हैं। हालांकि शहर के कुछ नालों का पानी अब भी नदी में जाने की समस्या बनी हुई है।
कई शहरों में अब भी नहीं हुआ निर्माण
प्रदेश में वर्तमान में 25 एसटीपी संचालित हैं, जबकि 3 निर्माणाधीन और 13 योजनागत चरण में हैं। वहीं पुसौर, धरमजयगढ़, लैलूंगा, खरसिया और घरघोड़ा जैसे क्षेत्रों में अभी एसटीपी निर्माण नहीं हो पाया है।
महानदी को प्रदूषण से बचाने के लिए लंबित एसटीपी परियोजनाओं को जल्द शुरू करना जरूरी माना जा रहा है, ताकि शहरों का गंदा पानी सीधे नदी में मिलने से रोका जा सके।







