Raigarh Cyber Fraud : शेयर ट्रेडिंग में मोटे मुनाफे का झांसा देकर डॉक्टर से 34.17 लाख की ठगी, इंदौर से एक और आरोपी गिरफ्तार

साइबर ठगी के संगठित नेटवर्क पर रायगढ़ पुलिस की कार्रवाई जारी, आरोपी के कब्जे से टाटा नेक्सॉन कार, लैपटॉप, तीन मोबाइल और 1.39 लाख रुपये नकद सहित करीब 12 लाख की संपत्ति जब्त।
रायगढ़। शेयर ट्रेडिंग में मोटा मुनाफा दिलाने का झांसा देकर रायगढ़ के एक डॉक्टर से 34 लाख 17 हजार 531 रुपये की ऑनलाइन ठगी करने वाले गिरोह के एक और सदस्य को रायगढ़ पुलिस ने मध्यप्रदेश के इंदौर से गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान रईस खान के रूप में हुई है। साइबर थाना रायगढ़ की टीम ने उसे इंदौर के कावेरी परिसर से पकड़ा और न्यायालय से ट्रांजिट रिमांड प्राप्त कर रायगढ़ लेकर आई। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से ठगी की रकम से खरीदी गई टाटा नेक्सॉन कार, लैपटॉप, तीन मोबाइल फोन, एटीएम और क्रेडिट कार्ड सहित करीब 12 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की है।
एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देशन में साइबर ठगी के संगठित नेटवर्क के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है। इस मामले में पुलिस पूर्व में गिरोह के तीन अन्य सदस्यों तरुण नागर, तनीषा पाटिल और ज्योति मालवीय को गिरफ्तार कर चुकी है।
व्हाट्सऐप पर पोर्टफोलियो भेजकर निवेश के लिए किया प्रेरित
पुलिस के मुताबिक, सोनकरपारा जूटमिल निवासी डॉ. दिलीप कुमार मिश्रा ने 27 मई 2026 को साइबर थाना रायगढ़ में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि मार्च 2025 में मोबाइल फोन के जरिए उनका संपर्क सुनील नामक व्यक्ति से हुआ था। उसने शेयर ट्रेडिंग में निवेश करने पर अधिक मुनाफा मिलने का लालच देकर स्पार्टन ट्रेड कंपनी में पैसा लगाने के लिए प्रेरित किया।
इसके बाद व्हाट्सऐप पर कंपनी का पोर्टफोलियो भेजकर निवेश पर अच्छा रिटर्न मिलने का भरोसा दिलाया गया। अलग-अलग मोबाइल नंबरों से अन्य लोगों ने भी उनसे संपर्क किया और निवेश के लिए प्रोत्साहित किया। 28 अप्रैल 2025 से 3 अप्रैल 2026 के बीच डॉक्टर से विभिन्न बैंक खातों में कुल 34,17,531 रुपये जमा कराए गए।
शुरुआत में पोर्टफोलियो में निवेश की रकम पर लगातार बढ़ता मुनाफा दिखाया जाता रहा। लेकिन जब डॉक्टर ने अपनी रकम निकालने की कोशिश की तो पैसे वापस नहीं मिले। इसके बजाय उनसे और अधिक निवेश करने का दबाव बनाया जाने लगा। ठगी का एहसास होने पर उन्होंने पुलिस से शिकायत की। इस पर साइबर थाना रायगढ़ में अपराध क्रमांक 06/2026 के तहत धारा 318(4), 3(5) बीएनएस में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
23 मोबाइल सिम और 100 से 150 सिम की सप्लाई का खुलासा
एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देश पर साइबर थाना पुलिस ने संदिग्ध मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और डिजिटल लेन-देन की जांच शुरू की। जांच के दौरान ज्योति मालवीय के नाम पर पंजीकृत मोबाइल नंबर से ठगी के तार जुड़े मिले। आगे पता चला कि उसके नाम पर 23 अन्य मोबाइल सिम भी संचालित हो रहे थे।
इसके बाद पुलिस टीम ने इंदौर के पलासिया क्षेत्र स्थित एक कॉल सेंटर में दबिश देकर तनीषा पाटिल को पकड़ा। वहीं विजय नगर क्षेत्र से ज्योति मालवीय और उसकी जानकारी के आधार पर परदेशीपुरा क्षेत्र से तरुण नागर को गिरफ्तार किया गया। तीनों को ट्रांजिट रिमांड की प्रक्रिया पूरी करने के बाद रायगढ़ लाया गया।
पूछताछ में ज्योति मालवीय ने अपने आधार कार्ड से जारी सिम कार्ड गिरोह को उपलब्ध कराने की बात स्वीकार की। उसने बताया कि सिम विक्रेता तरुण नागर के संपर्क में रहकर उसने करीब 100 से 150 सिम कार्ड गिरोह तक पहुंचाए थे। तनीषा पाटिल द्वारा भी गिरोह को सिम उपलब्ध कराने की जानकारी सामने आई।
डीमैट अकाउंट खुलवाने और निवेश की एडवाइजरी देता था रईस खान
पुलिस जांच में सामने आया कि रईस खान गिरोह के लिए मोबाइल सिम उपलब्ध कराने के साथ शेयर मार्केट में ट्रेडिंग के नाम पर लोगों को निवेश संबंधी सलाह देने का काम करता था। पूर्व में गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी और लगातार विवेचना के आधार पर पुलिस उसकी तलाश कर रही थी।
इसी दौरान साइबर थाना की टीम ने उसे इंदौर के कावेरी परिसर से गिरफ्तार किया। पूछताछ में रईस खान ने बताया कि वह पिछले करीब दो वर्षों से इंदौर में रहकर शेयर मार्केट से जुड़ी एडवाइजरी का काम कर रहा था। मुंबई मुख्यालय वाली एक शेयर मार्केट ब्रोकिंग कंपनी में सब-ब्रोकर के रूप में काम करते हुए वह अपने साथी के साथ इंदौर में सक्रिय था।
आरोपी के अनुसार, ट्रेडिंग अकाउंट में पैसा लगाकर अधिक मुनाफा कमाने का लालच देकर लोगों को निवेश के लिए तैयार किया जाता था। एडवाइजरी के काम में इस्तेमाल के लिए उसे बड़ी संख्या में मोबाइल सिम कार्ड की जरूरत होती थी। इसके लिए उसने तरुण नागर से करीब 100 से 150 सिम खरीदे थे। इन्हीं नंबरों से लोगों से संपर्क कर डीमैट अकाउंट खुलवाए जाते और ट्रेडिंग के नाम पर निवेश कराया जाता था।
डॉक्टर को चार बार फोन कर निवेश के लिए दिया था लालच
पुलिस के अनुसार, रईस खान ने 24 जून 2025 को डॉ. दिलीप मिश्रा को चार बार फोन किया था। इस दौरान उसने डीमैट अकाउंट खुलवाने और शेयर ट्रेडिंग में अधिक मुनाफा दिलाने का प्रलोभन दिया। उसके झांसे में आकर डॉक्टर ने अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर की थी।
पूछताछ में आरोपी ने यह भी स्वीकार किया कि इसी तरह अन्य लोगों को ऑनलाइन ठगी का शिकार बनाकर प्राप्त रकम से उसने नवंबर 2025 में टाटा नेक्सॉन कार, मोबाइल फोन और लैपटॉप खरीदे थे।
करीब 12 लाख की संपत्ति जब्त
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से ठगी की रकम से खरीदी गई एक टाटा नेक्सॉन कार, एक लैपटॉप, वनप्लस, रियलमी और आईफोन सहित तीन मोबाइल फोन, दो एटीएम कार्ड, एक क्रेडिट कार्ड, आधार कार्ड और 1 लाख 39 हजार 500 रुपये नकद जब्त किए हैं। जब्त संपत्ति की कुल कीमत करीब 12 लाख रुपये बताई गई है।
कार्रवाई में साइबर थाना की टीम की अहम भूमिका
इस कार्रवाई में साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक विजय चेलक, निरीक्षक विमल राय, आरक्षक पुष्पेन्द्र जाटवर, धर्मेन्द्र सिंह, जितेन्द्र कुर्रे, विकास प्रधान तथा महिला आरक्षक जयलक्ष्मी और मनीषा साहू की अहम भूमिका रही।
एसएसपी ने लोगों से की सतर्क रहने की अपील
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि साइबर ठग शेयर ट्रेडिंग, निवेश और अधिक मुनाफे का लालच देकर लोगों की मेहनत की कमाई हड़पने के लिए संगठित नेटवर्क चला रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर निवेश न करें और बिना सत्यापन किसी को भी अपनी बैंकिंग जानकारी, ओटीपी या मोबाइल सिम उपलब्ध न कराएं।






