रायगढ़ पिछड़ा स्टार्टअप रेस में, डेढ़ साल में एक भी पंजीयन नहीं – प्रदेश में 52 इकाइयां बनीं, 7 को मिली आर्थिक मदद

रायगढ़। युवाओं के प्रेरणास्रोत और वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने हाल ही में कहा कि युवा केवल सरकारी नौकरी की दौड़ में न भागें, बल्कि नए विकल्प तलाशें और खुद रोजगार देने वाले बनें। सरकार भी स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए पंजीयन और वित्त पोषण की सुविधा दे रही है। लेकिन हैरानी की बात है कि रायगढ़ जिला इस दिशा में पूरी तरह पिछड़ गया है। पिछले डेढ़ साल (जनवरी 2024 से जून 2025) में जिले से एक भी स्टार्टअप पंजीयन नहीं हुआ।
प्रदेश में इसी अवधि में कुल 52 स्टार्टअप इकाइयों का पंजीयन हुआ, जिनमें सबसे ज्यादा रायपुर के 34, दुर्ग के छह और बिलासपुर के पांच स्टार्टअप शामिल हैं। इनमें से सात इकाइयों को 5.45 करोड़ रुपए का वित्त पोषण भी दिया गया है। लेकिन रायगढ़ का नाम इस सूची में कहीं नहीं है।
सरकार की मंशा – नौकरियां लेने नहीं, देने वाले बनें युवा
छत्तीसगढ़ को वर्ष 2047 तक विकसित राज्य के रूप में तैयार करने के लिए सरकार युवाओं को स्टार्टअप के लिए प्रोत्साहित कर रही है। पंजीयन कराने वाली इकाइयों को वित्तीय सहयोग का प्रावधान है, ताकि युवा नए व्यवसाय खड़े कर सकें। मंत्री चौधरी का कहना है कि सिर्फ नौकरी करने की मानसिकता से बाहर निकलकर युवा खुद नौकरियां देने वाले उद्यमी बनें।
स्टार्टअप की सूची में राइस मिल भी शामिल
दिलचस्प बात यह है कि पंजीकृत इकाइयों में कुछ राइस मिल भी शामिल हैं। उद्योग विभाग पहले से ही राइस मिलों को पूंजीगत सब्सिडी देता रहा है। अब स्टार्टअप योजना के तहत पंजीकृत सात इकाइयों में से दो राइस मिलों को भी करीब ढाई करोड़ रुपए की सहायता दी गई है।
रायगढ़ को जागने की जरूरत
जहां राजधानी और अन्य जिलों में युवा स्टार्टअप की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, वहीं रायगढ़ जिला इस रफ्तार से पूरी तरह पीछे छूट गया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि युवाओं को जागरूक किया जाए और उद्योग विभाग सक्रिय पहल करे तो जिले में भी स्टार्टअप संस्कृति विकसित हो सकती है।






