ऑनलाइन खसरा रिकॉर्ड में गड़बड़ी: पिता के नाम की जगह दर्ज हुआ “रायपुर”, पटना उपतहसील के ग्राम रनई का मामला
निवास के पते में भी रायपुर, रिकॉर्ड की जांच और डाटा एंट्री प्रक्रिया पर उठे सवाल
बैकुण्ठपुर । छत्तीसगढ़ में राजस्व विभाग के अधिकांश काम ऑनलाइन किए जाने का उद्देश्य लोगों को कार्यालयों के चक्कर से राहत दिलाना है। लेकिन ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी की त्रुटियां सामने आने से भू-स्वामियों की परेशानी घटने के बजाय बढ़ रही है। कोरिया जिले के पटना उपतहसील अंतर्गत ग्राम रनई में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां ऑनलाइन खसरा रिकॉर्ड में एक भूमि स्वामी के पिता के नाम के स्थान पर प्रदेश की राजधानी “रायपुर” दर्ज है।
खसरा नंबर 934 के रिकॉर्ड में त्रुटि
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम रनई के खसरा नंबर 934 (रकबा 1.8200 हेक्टेयर) के ऑनलाइन रिकॉर्ड में भूमि स्वामी का नाम श्यामप्यारे हर्ष एक्सट्रेक्ट्स लिमिटेड दर्ज है। इसी रिकॉर्ड में पिता के नाम के कॉलम में “रायपुर” लिखा है और निवासी का पता भी रायपुर दर्शाया गया है। इस प्रविष्टि के सामने आने के बाद रिकॉर्ड की जांच और डाटा एंट्री की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
बिना जांच-परख एंट्री का आरोप
डिजिटल इंडिया के तहत राजस्व रिकॉर्ड ऑनलाइन करते समय जानकारी की जांच और भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया अहम मानी जाती है। पिता के नाम और निवास के स्थान पर शहर का नाम दर्ज होने से यह सवाल उठ रहा है कि ऑनलाइन प्रविष्टि से पहले रिकॉर्ड की जांच किस स्तर पर की गई। हालांकि, इस त्रुटि के कारणों की पुष्टि संबंधित विभागीय स्तर से अभी नहीं हो सकी है।
सुधार के लिए लगाने पड़ते हैं चक्कर
भू-स्वामियों को अक्सर गलत प्रविष्टि का पता बाद में चलता है। इसके बाद सुधार के लिए उन्हें पटवारी से लेकर संबंधित राजस्व कार्यालयों तक चक्कर काटने पड़ते हैं। ऑनलाइन व्यवस्था का मकसद प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना है, पर त्रुटि होने पर सुधार की लंबी प्रक्रिया लोगों के लिए परेशानी बन जाती है।
जांच के बाद ही साफ होगा कारण
इस प्रविष्टि की जिम्मेदारी और त्रुटि का असली कारण राजस्व रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। जानकारों का कहना है कि रिकॉर्ड अपलोड करने से पहले दस्तावेजों के सत्यापन और ऑनलाइन एंट्री की निगरानी की व्यवस्था को प्रभावी बनाने की जरूरत है, ताकि भू-स्वामियों को सुधार के लिए अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।






