न्यायिक कार्यवाही को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम: मुख्य सचिव अमिताभ जैन का निर्देश

रायपुर, 9 जुलाई 2025 :
छत्तीसगढ़ शासन ने न्यायालयों में लंबित मामलों के त्वरित और सुरक्षित निपटारे को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल की है। राज्य के मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने प्रदेश के सभी जिलों के कलेक्टरों को पत्र जारी कर निर्देशित किया है कि न्यायिक कार्यवाही में श्रव्य-दृश्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों (Audio-Video Electronic Means) का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
मुख्य सचिव ने पत्र में लिखा कि अभियुक्तों और साक्षियों को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित कराने की परंपरागत प्रक्रिया में समय, संसाधन और सुरक्षा का भारी दबाव रहता है। खासकर जेल में बंद आरोपियों को अदालत लाने में न केवल पुलिस बल की तैनाती करनी पड़ती है, बल्कि कई बार सुरक्षा जोखिम भी उत्पन्न हो जाते हैं। इसी तरह, चिकित्सकों, बैंककर्मियों व अन्य सरकारी सेवकों की व्यक्तिगत उपस्थिति से उनकी नियमित सेवाएं बाधित होती हैं और शासन पर आर्थिक बोझ भी बढ़ता है।
मुख्य सचिव ने बताया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 में ऑडियो-वीडियो तकनीक के उपयोग को प्रोत्साहित किया गया है। इस विधिक प्रावधान के तहत राज्य शासन चाहता है कि न्यायालयों में अभियुक्तों और साक्षियों की उपस्थिति व परीक्षण, जहां संभव हो, डिजिटल माध्यमों से किया जाए।
इसके लिए उन्होंने निर्देश दिया है कि प्रत्येक जिले में जिला एवं सत्र न्यायालय की अध्यक्षता में गठित मॉनिटरिंग समिति की बैठक के एजेंडा में इस मुद्दे को शामिल किया जाए और इस पर ठोस कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।













