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धान खरीदी से पहले किसानों का कड़ा डेटा फिल्टर, बिना एग्रीस्टेक पंजीयन नहीं बिकेगा धान

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रायगढ़। इस बार धान खरीदी शुरू होने से पहले सरकार ने पंजीयन प्रक्रिया को पूरी तरह सख्त और डिजिटल बना दिया है। किसानों का डाटा कई स्तरों पर फिल्टर किया जा रहा है। अब एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीकृत किसान ही धान बेच सकेंगे।

जिले में यह प्रक्रिया तेजी से चल रही है, लेकिन अब भी करीब 2,000 किसान ऐसे हैं जिनका पंजीयन अधूरा है। ये वे किसान हैं जिन्होंने पिछले वर्ष धान बेचा था, लेकिन इस बार उनका पंजीयन तकनीकी या दस्तावेजी कारणों से नहीं हो पा रहा है।

सरकार का कहना है कि हर साल अरबों रुपये का धान खरीदने के बाद उठाव में भारी नुकसान होता है। इस बार नुकसान कम करने के लिए डिजिटल सत्यापन और मिलान प्रक्रिया को सख्त किया गया है।

🔹 तीन चरणों में हो रहा डाटा सत्यापन

1. एग्रीस्टेक पंजीयन – किसान की पूरी व्यक्तिगत व भूमि संबंधी जानकारी दर्ज की जा रही है।


2. डिजिटल क्रॉप सर्वे – खेत में जाकर फसल की फोटो सहित एंट्री की जा रही है।


3. राजस्व और कृषि विभाग द्वारा गिरदावरी मिलान – सभी रिकॉर्ड के मिलान के बाद ही अंतिम सूची तैयार की जाएगी।

🔹 रायगढ़ जिले की स्थिति

वर्ष 2024-25 में 73,295 किसानों ने धान बेचने के लिए आवेदन किया था। इनमें से अब तक 71,203 किसानों का पंजीयन पूरा हो चुका है, जबकि 2,092 किसानों का पंजीयन अटका हुआ है।

मुख्य रूप से समस्या अधिया, रेगहा या वन अधिकार पट्टे पर खेती करने वाले किसानों के साथ सामने आई है, क्योंकि इन जमीनों के दस्तावेजों में किसान का नाम दर्ज नहीं है।

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