भारत-इज़राइल रक्षा साझेदारी: 10 बिलियन डॉलर के रणनीतिक सौदे से भारतीय सेना और मजबूत

नई दिल्ली, 26 फरवरी 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया इज़राइल दौरे ने दोनों देशों के बीच 10 बिलियन डॉलर (लगभग 83,000 करोड़ रुपये) के विशाल रक्षा सौदे की नींव रख दी है। यह महा-सौदा सिर्फ हथियार खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत में हथियार निर्माण और टेक्नोलॉजी साझेदारी के रूप में भी देखा जा रहा है।
सौदे में शामिल हथियार और तकनीक
इस साझेदारी के तहत भारतीय सेना को जमीन, हवा और समुद्र तीनों मोर्चों पर अत्याधुनिक क्षमताएँ मिलेंगी। सौदे में शामिल प्रमुख हथियारों में:
- स्मार्ट मिसाइलें
- घातक ड्रोन्स
- सटीक लक्ष्य साधने वाले स्मार्ट बम
- अत्याधुनिक लेजर हथियार
सिर्फ हथियार खरीदने की बजाय, भारत में इज़राइल के साथ मिलकर उत्पादन और तकनीक हस्तांतरण भी किया जाएगा। इज़राइल के ‘हेक्सागन एलायंस’ और भारत के IMEC कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट्स इस साझेदारी को सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण बनाते हैं।
पाकिस्तानी सीमा पर घातक ड्रोन्स की दहशत
विशेष रूप से पाकिस्तान की चिंता बढ़ाने वाला पहलू है इज़राइली ड्रोन तकनीक, जिसने 2025 के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में अपनी मारक क्षमता साबित की। इनमें शामिल हैं:
- हारोप (Harop) – आत्मघाती ड्रोन, जो घंटों आसमान में मंडराकर दुश्मन के रडार और बंकरों को ढूंढकर खुद को फोड़ देता है।
- हेरॉन टीपी (Heron TP) – लंबी उड़ान क्षमता वाला ड्रोन, जो सीमा पर लगातार निगरानी रखता है।
- हर्मेस 900 (Hermes 900 / दृष्टि-10) – अडाणी ग्रुप के साथ भारत में विकसित ड्रोन, जो पश्चिमी सीमा पर 24 घंटे नजर रखता है।
इन आधुनिक ड्रोन्स के मुकाबले पाकिस्तान के पास कोई ठोस तकनीक नहीं है, जिससे उसकी सीमा सुरक्षा और घबराहट पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ा है।
रणनीतिक महत्व
विशेषज्ञों के अनुसार, यह रक्षा सौदा भारत और इज़राइल के बीच स्ट्रैटेजिक और तकनीकी सहयोग को नई ऊँचाई पर ले जाएगा। केवल हथियारों की खरीद नहीं, बल्कि स्थानीय उत्पादन और कौशल विकास भी भारत की सेना को लंबे समय तक सक्षम बनाएगा।






