रायगढ़ में केलो नदी और खम्हार पाकुट जलाशय का निरीक्षण, कलेक्टर ने पर्यटन और संरक्षण पर दिया जोर

कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने प्राकृतिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थलों का किया निरीक्षण
Raigarh जिले के लैलूंगा विकासखंड में कलेक्टर Mayank Chaturvedi ने केलो नदी के उद्गम स्थल पहाड़ लुड़ेग और खम्हार पाकुट जलाशय का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन संभावनाओं का अवलोकन किया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
केलो नदी उद्गम स्थल को पर्यटन और संरक्षण का केंद्र बनाने की योजना
ग्राम पहाड़ लुड़ेग में निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने स्थानीय ग्रामीणों से नदी के इतिहास और उद्गम स्थल से जुड़ी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि यह स्थल प्राकृतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसे संरक्षित रखते हुए पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के प्रयास किए जाएंगे। ग्रामीणों की मांग पर लैलूंगा से पहाड़ लुड़ेग तक सड़क निर्माण की आवश्यकता पर विचार करने का आश्वासन भी दिया। साथ ही ग्राम पंचायत को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित करने की पहल का भरोसा दिलाया। कलेक्टर ने ग्रामीणों से अपेक्षा जताई कि वे केलो नदी के उद्गम स्थल को सुरक्षित और संरक्षित बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाएं और अपने सुझाव 15 दिनों के भीतर प्रशासन को दें, ताकि आगामी योजनाओं में उनका समावेश किया जा सके।
खम्हार पाकुट जलाशय में मछली पालन और पर्यटन विकास
कलेक्टर ने ग्राम पंचायत जाम बहार स्थित खम्हार पाकुट जलाशय का भी निरीक्षण किया। उन्होंने जल संसाधन संभाग धरमजयगढ़ के कार्यपालन अभियंता और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों से निर्माण कार्य की प्रगति की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान आदिवासी मत्स्य समिति द्वारा जलाशय में किए जा रहे मछली पालन कार्य की सराहना की और उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।
जलाशय के तटीय क्षेत्र का पर्यटन केंद्र बनाने के निर्देश
कलेक्टर चतुर्वेदी ने खम्हार पाकुट जलाशय के तटीय क्षेत्र को पर्यटन दृष्टि से विकसित करने हेतु सौंदर्यीकरण की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। इसके लिए आर्किटेक्ट की मदद से विस्तृत ब्लूप्रिंट तैयार कराने का आदेश जल संसाधन संभाग धरमजयगढ़ के कार्यपालन अभियंता को दिया गया, ताकि भविष्य में यह क्षेत्र आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सके।
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि पर्यटन विकास और संरक्षण दोनों का संतुलन बनाए रखना प्राथमिकता होगी, जिससे ग्रामीणों के लिए रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।






