साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश, “म्यूल अकाउंट” के जरिए हो रही थी रकम की हेराफेरी

दुर्ग | दुर्ग पुलिस ने साइबर ठगी के एक संगठित नेटवर्क का खुलासा करते हुए दो आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जांच में सामने आया कि आरोपी बैंक खातों को “म्यूल अकाउंट” के रूप में इस्तेमाल कर ठगी की रकम अपने खातों में ट्रांसफर करवा रहे थे।
गृह मंत्रालय से मिली जानकारी पर कार्रवाई
पुलिस को यह सफलता गृह मंत्रालय के समन्वय पोर्टल से प्राप्त इनपुट के आधार पर मिली। इसमें कई संदिग्ध ट्रांजैक्शन की जानकारी सामने आई थी। जांच के दौरान पता चला कि बंधन बैंक के खातों का उपयोग ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए किया जा रहा था।
आरोपियों की पहचान
पुलिस ने जिन दो आरोपियों को चिन्हित किया है, उनमें:
- झावेश यादव (30) — 30 अक्टूबर से 1 नवंबर 2024 के बीच ₹74,507 प्राप्त किए
- जितेंद्र यादव (31) — 16 अगस्त से 30 सितंबर 2024 के बीच ₹1,66,336 जमा किए गए
ऐसे चलता था ठगी का खेल
जांच में खुलासा हुआ कि दोनों आरोपियों ने अपने नाम पर बैंक खाते खुलवाए और इन्हें साइबर अपराधियों को उपयोग के लिए उपलब्ध कराया। इन खातों के माध्यम से ऑनलाइन ठगी की रकम ट्रांसफर कर निकाल ली जाती थी, जिससे असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता था।
कानूनी कार्रवाई
दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 317(2) और 318(4) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।
पुलिस की अपील
दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपना बैंक खाता इस्तेमाल न करने दें और व्यक्तिगत बैंकिंग जानकारी साझा करने से बचें। संदिग्ध लेनदेन की तुरंत सूचना पुलिस को देने की सलाह दी गई है।






