छत्तीसगढ़

धमतरी में अफीम की अवैध खेती पर प्रशासन की सख्ती, कलेक्टर ने कहा- सर्वे में कहीं नहीं मिली अवैध फसल

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धमतरी: छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में अवैध अफीम खेती के मामले सामने आने के बाद धमतरी जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है. इसी क्रम में आयुक्त, भू-अभिलेख छत्तीसगढ़ द्वारा राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को संभावित क्षेत्रों में सर्वे कर विस्तृत जांच रिपोर्ट 15 दिवस के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए गए थे.

निर्देशों के पालन में धमतरी कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जिले में व्यापक स्तर पर सर्वे और जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए. अपर कलेक्टर (भू-अभिलेख) इंदिरा देवहारी एवं प्रभारी अधिकारी भू-अभिलेख मनोज मरकाम के नेतृत्व में राजस्व, कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित कर क्षेत्रवार निरीक्षण कराया गया.

ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पटवारी, राजस्व निरीक्षक, तहसीलदार, एसडीएम, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर सर्वे कार्य की रूपरेखा तय की गई. सभी क्षेत्रों में गहन जांच सुनिश्चित की गई.

“धमतरी में अफीम की अवैध खेती नहीं”

प्रशासन द्वारा जिले के संवेदनशील एवं दूरस्थ क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखते हुए मगरलोड क्षेत्र, डुबान एरिया तथा उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र सहित संभावित स्थानों पर भी विस्तृत सर्वे कराया गया. संयुक्त अमले द्वारा खेतों और ग्रामीण इलाकों का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का सत्यापन किया गया. सर्वे के दौरान प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार धमतरी जिले में कहीं भी अवैध रूप से अफीम की खेती नहीं पाई गई, जिसे प्रशासन ने जिले के लिए सकारात्मक और राहत भरी स्थिति बताया है.

कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने बताया कि राज्य शासन के निर्देश के बाद जिले के सभी क्षेत्रों में व्यापक सर्वे कराया गया है. उन्होंने कहा कि अब तक किसी भी जगह पर अफीम की अवैध खेती नहीं मिली है. मगरलोड, डुबान क्षेत्र और उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व इलाके में भी विशेष रूप से जांच कराई गई, जहां स्थिति पूरी तरह सामान्य पाई गई.

कलेक्टर ने कहा कि जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखना और कृषि गतिविधियों की सतत निगरानी प्रशासन की प्राथमिकता है. अवैध गतिविधियों पर पूर्णतः रोक लगाने के लिए सभी विभागों के समन्वय से लगातार कार्रवाई की जा रही है. आगे भी नियमित निरीक्षण, निगरानी और जनजागरूकता अभियान जारी रहेंगे.

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