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धान खरीदी का त्योहार आज से शुरू, सख्ती के बीच इस बार घटा रकबा और किसान संख्या

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छत्तीसगढ़ में आज से धान खरीदी का बहुप्रतीक्षित त्योहार शुरू हो गया है। किसानों के लिए साल भर का इंतजार आज खत्म हुआ, लेकिन शुरुआत के साथ ही कुछ चुनौतियाँ भी सामने आई हैं। सहकारी कर्मचारियों की हड़ताल के कारण व्यवस्था पर असर पड़ा, हालांकि सरकार ने तुरंत वैकल्पिक कदम उठाते हुए अन्य विभागों के कर्मचारियों को खरीदी केंद्रों में तैनात कर दिया है। हड़ताल को रोकने के लिए सरकार ने एस्मा भी लागू कर दिया है।

इस बार घटा पंजीकृत रकबा और किसानों की संख्या
कड़ाई से किए गए पंजीयन और एग्रीस्टेक की अनिवार्यता का असर इस वर्ष साफ नजर आ रहा है। गिरदावरी और डिजिटल क्रॉप सर्वे के बाद जो वास्तविक डेटा सामने आया है, उसके अनुसार पिछले वर्ष की तुलना में पंजीकृत रकबा और किसानों दोनों की संख्या में कमी आई है।

  • रकबा 9.25% कम
  • 12 हजार हेक्टेयर से अधिक की कटौती
  • किसानों की संख्या 3391 कम

पिछले साल रायगढ़ जिले में 85,238 किसानों का 1,27,036 हेक्टेयर रकबा पंजीकृत था, जबकि इस बार 81,847 किसानों का 1,15,288 हेक्टेयर ही पंजीकृत किया गया है।

क्यों घटी संख्या?
इस बार सख्त वेरिफिकेशन प्रक्रिया से फर्जी रकबा एंट्री पर रोक लगी है। कई जगह यह पाया गया कि कुछ किसान बिना फसल लगाए ही पंजीयन करा रहे थे। समिति प्रबंधकों और बिचौलियों की मिलीभगत से ऐसे मामलों में वर्षों से धान बेचा जा रहा था। लेकिन डिजिटल सर्वे और वास्तविक निरीक्षण के कारण अब केवल वास्तविक फसल वाले खेत ही पंजीयन में शामिल हो सके हैं।

कुछ समितियों में तो रकबा 17% तक घटा है, जो सख्ती का सीधा संकेत है।

संशोधन की अंतिम तिथि 31 नवंबर
राज्य सरकार ने पंजीयन संशोधन के लिए 31 नवंबर तक विंडो खोली है, लेकिन बड़े बदलाव की संभावना फिलहाल कम ही मानी जा रही है।

धान खरीदी की सुचारू व्यवस्था के लिए सरकार ने तैयारियाँ पूरी होने का दावा किया है। अब देखना होगा कि यह खरीदी सीजन किसानों के लिए कितना सहज और पारदर्शी साबित होता है।

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