छत्तीसगढ़ में कर्मचारियों का प्रदेशव्यापी प्रदर्शन, मांगों को लेकर सरकार पर दबाव

रायपुर। छत्तीसगढ़ में कर्मचारी-अधिकारियों की विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन ने अब बड़ा रूप ले लिया है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के आह्वान पर बुधवार को प्रदेशभर में भोजनावकाश के दौरान हजारों कर्मचारियों और शिक्षकों ने जोरदार प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
राजधानी रायपुर में दिखा असर
राजधानी रायपुर और नवा रायपुर में आंदोलन का सबसे अधिक प्रभाव देखने को मिला। यहां कर्मचारियों ने इंद्रावती भवन से रैली निकालते हुए अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की।
आंदोलन का नेतृत्व फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा और महासचिव चंद्रशेखर तिवारी ने किया।
जिलों में भी उतरे कर्मचारी
राज्य के विभिन्न जिलों में भी कर्मचारियों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया।
महासमुंद, धमतरी, गरियाबंद और बलौदाबाजार सहित कई जिलों में रैलियां निकाली गईं। वहीं दुर्ग संभाग के राजनांदगांव, बालोद, बेमेतरा और कबीरधाम में भी आंदोलन को व्यापक समर्थन मिला।
बिलासपुर संभाग के जांजगीर-चांपा, कोरबा, मुंगेली और रायगढ़ में भी कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। इसके अलावा बस्तर और सरगुजा संभाग के जिलों में भी बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया।
इन मांगों को लेकर आंदोलन
फेडरेशन की प्रमुख मांगों में महंगाई भत्ता एरियर का भुगतान, समयमान वेतनमान (8, 16, 24 और 32 वर्ष), 300 दिन तक अर्जित अवकाश नगदीकरण और वेतन विसंगतियों का निराकरण शामिल है।
इसके साथ ही शिक्षकों को नियुक्ति तिथि से सेवा लाभ देने, अनुकंपा नियुक्ति में छूट, पंचायत सचिवों का शासकीयकरण, नगरीय निकाय कर्मचारियों को नियमित वेतन, संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण और रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती की मांग भी उठाई गई।
सरकार को चेतावनी
फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने कहा कि यदि सरकार जल्द कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि प्रदेशभर में कर्मचारियों का समर्थन लगातार बढ़ रहा है।






