23 साल पुराने जग्गी हत्याकांड में बड़ा फैसला: अमित जोगी को हाईकोर्ट से उम्रकैद, सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

रायपुर में 2003 के हत्याकांड पर कोर्ट का बड़ा फैसला, राज्य की राजनीति में हलचल
छत्तीसगढ़ की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। Ajit Jogi के बेटे और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष अमित जोगी को हाईकोर्ट ने रामावतार जग्गी हत्याकांड मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
23 साल पुराने मामले में दोषी करार, IPC 302 और 120-B के तहत सजा
4 जून 2003 को रायपुर में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या हुई थी।
इस मामले में कोर्ट ने अमित जोगी को IPC की धारा 302 और 120-B के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और 1000 रुपये जुर्माना लगाया है।
जुर्माना न भरने पर अतिरिक्त 6 महीने की सजा का भी प्रावधान रखा गया है।
लंबी कानूनी लड़ाई: पहले बरी, अब उम्रकैद
- कुल 31 आरोपी बनाए गए थे
- 3 लोग सरकारी गवाह बने
- 28 आरोपियों को पहले ही सजा हो चुकी थी
- 2007 में निचली अदालत ने अमित जोगी को बरी कर दिया था
इसके बाद मृतक के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसे बाद में हाईकोर्ट भेजा गया।
सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, 20 अप्रैल को होगी सुनवाई
हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अमित जोगी ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को तय की गई है, जिस पर सबकी नजरें टिकी हैं।
फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रिया, पक्ष-विपक्ष में बयानबाजी
फैसले का सतीश जग्गी ने स्वागत किया है, जबकि अमित जोगी ने इसे “अपने खिलाफ बड़ा अन्याय” बताया है और न्याय की उम्मीद जताई है।
वहीं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने फैसले को स्वागत योग्य बताया, जबकि विपक्ष ने इसे अदालत का विषय बताते हुए टिप्पणी से दूरी बनाई है।
राजनीति पर असर: जोगी परिवार और राज्य की सियासत में बड़ा मोड़
23 साल पुराने इस मामले के फैसले ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जो इस मामले का अंतिम और निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।






