अमेरिका–ईरान तनाव पर बड़ा मोड़: होर्मुज संकट के बीच 14 दिन के युद्धविराम पर सहमति, वैश्विक युद्ध टला

होर्मुज संकट के बीच दुनिया की सांसें थमीं, अंतिम समय में सीजफायर पर बनी सहमति
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया को युद्ध के कगार पर ला खड़ा किया था। लेकिन अंतिम समय में दोनों देशों के बीच अस्थायी युद्धविराम (सीजफायर) पर सहमति बन गई, जिससे बड़ा सैन्य टकराव टल गया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बढ़े विवाद से जुड़ा था, जहां वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा निर्भर करता है।
ट्रंप का अल्टीमेटम: होर्मुज खोलो या विनाश के लिए तैयार रहो
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को सख्त चेतावनी दी थी कि यदि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नहीं खोलता, तो अमेरिका कठोर सैन्य कार्रवाई करेगा।
अल्टीमेटम की समयसीमा खत्म होने से कुछ घंटे पहले ही सीजफायर की घोषणा सामने आई।
सीजफायर से पहले तनाव चरम पर, तेल ठिकानों पर हमलों ने बढ़ाई चिंता
बताया जा रहा है कि युद्धविराम से पहले तेल भंडारों और रणनीतिक ठिकानों पर हमलों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया था।
इस दबाव के बीच ईरान भी बातचीत की टेबल पर आने के लिए मजबूर हुआ।
पाकिस्तान की मध्यस्थता, पर्दे के पीछे निभाई अहम भूमिका
रिपोर्ट्स के अनुसार, Shehbaz Sharif के नेतृत्व में पाकिस्तान ने इस समझौते में मध्यस्थ की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पाकिस्तानी सैन्य और कूटनीतिक चैनलों ने अमेरिका और ईरान के बीच संदेशों का आदान-प्रदान कराया।
चीन का दखल और वैश्विक दबाव ने बदला समीकरण
कहा जा रहा है कि चीन ने भी ईरान पर कूटनीतिक दबाव बनाकर समझौते की दिशा में भूमिका निभाई।
ईरान के प्रमुख सहयोगी देशों के संपर्क और वैश्विक आर्थिक दबाव ने स्थिति को नरम करने में योगदान दिया।
14 दिन का अस्थायी युद्धविराम, होर्मुज पर जहाजों के शुल्क पर सहमति
समझौते के तहत ईरान और ओमान को होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की अनुमति दी गई है।
इसके साथ ही 14 दिनों के लिए संघर्षविराम लागू किया गया है, जिसमें आगे स्थायी समाधान पर बातचीत होगी।
ईरान का बयान: यह शांति नहीं, सिर्फ विराम है
ईरान ने स्पष्ट किया है कि यह समझौता स्थायी शांति नहीं है, बल्कि अस्थायी युद्धविराम है।
ईरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी उकसावे पर वह कड़ा जवाब देगा और अपनी तैयारियां जारी रखेगा।
इज़राइल ने दी प्रतिक्रिया, लेबनान मोर्चा अलग रहेगा
Benjamin Netanyahu ने इस युद्धविराम का समर्थन किया है, लेकिन स्पष्ट किया कि लेबनान में संघर्ष जारी रहेगा और यह समझौता वहां लागू नहीं होगा।






