सेट परीक्षा के संचालन पर उठे सवाल, कर्मचारियों ने अव्यवस्था और भेदभाव के लगाए आरोप

रायगढ़ में परीक्षा ड्यूटी को लेकर आब्जर्वर और कर्मचारियों में नाराजगी का दावा, निजी वाहनों से आवाजाही और पेट्रोल-डीजल खर्च नहीं मिलने पर भी उठाए सवाल
रायगढ़। छत्तीसगढ़ राज्य पात्रता परीक्षा (सेट-26) 2026 के संचालन को लेकर रायगढ़ में परीक्षा ड्यूटी में संलग्न आब्जर्वर, शिक्षक और कर्मचारियों के बीच नाराजगी सामने आई है। कर्मचारियों की ओर से परीक्षा से पहले दिए गए निर्देशों और परीक्षा के दिन नियमों की व्याख्या में अंतर होने, ड्यूटी आवंटन में कथित भेदभाव तथा निजी वाहनों के इस्तेमाल के बावजूद पेट्रोल-डीजल खर्च नहीं दिए जाने जैसे मुद्दे उठाए गए हैं। इन आरोपों को लेकर जिला प्रशासन और परीक्षा संचालन व्यवस्था पर सवाल खड़े किए गए हैं।
ब्रीफिंग के निर्देशों और परीक्षा के दिन की कार्यप्रणाली पर सवाल
कर्मचारियों की ओर से लगाए गए आरोपों के अनुसार, परीक्षा से पहले हुई ब्रीफिंग के दौरान कुछ निर्देश दिए गए थे, जबकि 4 अक्टूबर 2026 को परीक्षा के दिन नियमों का हवाला देकर अलग बातें कही गईं। आरोप है कि पहले दिए गए निर्देशों से इनकार भी किया गया।
कर्मचारियों का कहना है कि परीक्षा संचालन में लगे कर्मियों को नियमों की पर्याप्त जानकारी नहीं होने की बात कही गई। ऐसे में सवाल उठाया गया है कि महत्वपूर्ण परीक्षा की जिम्मेदारी सौंपने से पहले संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के अनुभव तथा नियमों की जानकारी का आकलन किया गया था या नहीं।
ड्यूटी आवंटन में भेदभाव के आरोप
परीक्षा ड्यूटी आवंटन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कुछ विभागों के ऐसे अधिकारियों को आब्जर्वर की ड्यूटी से छूट मिली, जिन्हें सरकारी वाहन और ईंधन की सुविधा उपलब्ध रहती है। वहीं, निजी वाहन रखने वाले अन्य अधिकारी-कर्मचारियों की ड्यूटी दूरस्थ परीक्षा केंद्रों में लगाई गई।
कर्मचारियों का दावा है कि कुछ लोगों को शहर के भीतर ही जिम्मेदारी दी गई, जबकि निजी वाहनों से ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों को 30 से 35 किलोमीटर दूर स्थित केंद्रों तक जाना पड़ा। उन्हें परीक्षा संबंधी सामग्री के परिवहन के लिए कई बार आवाजाही भी करनी पड़ी। आरोप है कि इस दौरान पेट्रोल-डीजल या वाहन खर्च के लिए पर्ची उपलब्ध नहीं कराई गई।
परीक्षा सामग्री के परिवहन को लेकर भी नाराजगी
कर्मचारियों ने प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिकाओं के परिवहन की व्यवस्था पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि जिस काम को एक ही बार में पूरा किया जा सकता था, उसके लिए निजी वाहनों से दो-दो बार आवाजाही कराई गई।
कर्मचारियों के अनुसार, दूरस्थ केंद्रों पर तैनात आब्जर्वरों को अपनी मूल जिम्मेदारी यानी परीक्षा की निगरानी करने के बजाय सामग्री के परिवहन में व्यस्त रखा गया। उनका सवाल है कि ऐसी व्यवस्था से परीक्षा की निगरानी प्रभावित होने की आशंका को कैसे दूर किया गया।
सख्त नियमों और कार्रवाई के डर का मुद्दा
कर्मचारियों ने परीक्षा में नकल रोकने के लिए लागू सख्त निर्देशों और उनके पालन के तरीके पर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि परीक्षा में किसी प्रकार की गड़बड़ी रोकना जरूरी है, लेकिन ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को भी स्पष्ट निर्देश और उचित सहयोग मिलना चाहिए।
आरोप है कि नियमों का हवाला देकर अधीनस्थ कर्मचारियों पर दबाव बनाया गया, जिससे उनमें असंतोष और हतोत्साह की स्थिति पैदा हुई है। कर्मचारियों का मानना है कि परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी निभाने वालों के साथ समन्वय और सम्मानजनक व्यवहार भी जरूरी है।
परीक्षा बहिष्कार की चेतावनी जैसे हालात बनने की आशंका
इस पूरे मामले को लेकर कर्मचारियों में असंतोष बढ़ने का दावा किया गया है। उनका कहना है कि यदि परीक्षा संचालन की व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ और ड्यूटी आवंटन में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की गई, तो भविष्य में भर्ती एवं पात्रता परीक्षाओं में जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी-कर्मचारी बहिष्कार जैसे कदम पर विचार कर सकते हैं।
कर्मचारियों ने व्यापम के उच्चाधिकारियों से व्यवस्था की समीक्षा करने, ड्यूटी आवंटन के स्पष्ट मापदंड तय करने और निजी वाहनों से कराए जाने वाले कार्यों के लिए उचित व्यवस्था बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन की ओर से विरोध दर्ज कराया जा सकता है।






