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114 राफेल जेट डील में बड़ा अपडेट: स्वदेशी हथियारों के इंटीग्रेशन पर जोर, भारत करेगा टेक्नोलॉजी कंट्रोल मजबूत

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नई दिल्ली। भारत द्वारा प्रस्तावित 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस मेगा डील में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि स्वदेशी रूप से विकसित मिसाइलों और हथियार प्रणालियों को इन विमानों में पूरी तरह एकीकृत किया जा सके।

Buy and Make डील में ‘ICD’ होगा अनिवार्य हिस्सा
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह सौदा “Buy and Make” मॉडल के तहत सरकार-से-सरकार (G-to-G) डील के रूप में आगे बढ़ेगा। इसमें इंटरफेस कंट्रोल डॉक्यूमेंट (ICD) को अनिवार्य किया जाएगा, जो विमान और उसके हथियार सिस्टम के बीच तकनीकी एकीकरण को नियंत्रित करता है।

DAC से पहले ही मिल चुकी है मंजूरी, RFP की तैयारी
रक्षा मंत्रालय अगले महीने फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन को रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी कर सकता है। इससे पहले रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) 12 फरवरी को इस प्रस्ताव को मंजूरी दे चुकी है और अब अनुबंध वार्ता की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।

96 विमान भारत में बनेंगे, 18 फ्रांस से मिलेंगे
प्रस्तावित योजना के अनुसार, कुल 114 में से 18 राफेल विमान फ्रांस से ‘फ्लाई-अवे’ स्थिति में मिलेंगे, जबकि 96 विमान भारत में ही निर्मित किए जाएंगे। इनमें 25% से अधिक स्वदेशी सामग्री के उपयोग का लक्ष्य रखा गया है।

सोर्स कोड को लेकर विवाद और स्पष्टीकरण
रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट ने राफेल का सोर्स कोड साझा करने से इनकार किया है। हालांकि रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी देश द्वारा लड़ाकू विमानों का मालिकाना सॉफ्टवेयर कोड साझा करना आमतौर पर संभव नहीं होता, और यह डील तकनीकी रूप से सही दिशा में आगे बढ़ रही है।

स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम पर भी भारत का फोकस
भारत भविष्य में विदेशी निर्भरता कम करने के लिए स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम पर भी जोर दे रहा है। इसमें तेजस Mk-1A, लंबी दूरी की मिसाइलें और दो इंजन वाला AMCA प्रोजेक्ट शामिल है, जिससे देश की एयर डिफेंस क्षमता को मजबूत किया जा सके।

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