पश्चिम एशिया संघर्ष का असर: भारत में LPG बुकिंग सिस्टम पर दबाव, कई शहरों में बढ़ी चिंता

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और समुद्री मार्गों में आई बाधाओं का असर अब भारत की LPG आपूर्ति व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। कई शहरों में उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि गैस सिलेंडर बुकिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले IVRS, मोबाइल ऐप और व्हाट्सऐप-आधारित प्लेटफॉर्म बार-बार फेल हो रहे हैं और सर्वर डाउन का संदेश दिखा रहे हैं।
इस स्थिति के कारण उपभोक्ताओं में चिंता बढ़ गई है और कई स्थानों पर गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। डिस्ट्रीब्यूटर्स के अनुसार सामान्य दिनों की तुलना में बुकिंग की संख्या लगभग दस गुना तक बढ़ गई है, जिससे तकनीकी सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव पड़ गया है और डिलीवरी की गति भी प्रभावित हुई है।
सरकार का बयान: सप्लाई बंद नहीं
सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू LPG की सप्लाई बंद नहीं हुई है। हालांकि बढ़ी हुई मांग और घबराहट में की जा रही बुकिंग के कारण डिलीवरी में देरी हो रही है।
वहीं कई शहरों में वाणिज्यिक LPG की उपलब्धता कम हो गई है, जिससे रेस्टोरेंट, कैटरिंग सेवाएं, हॉस्टल और अन्य प्रतिष्ठान प्रभावित हुए हैं। केरल में उद्योग संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो लगभग 40 प्रतिशत रेस्टोरेंट अस्थायी रूप से बंद हो सकते हैं।
स्थिति को संभालने के लिए केंद्र सरकार ने घरेलू उपयोग के लिए केरोसिन और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में कोयले के अस्थायी उपयोग की अनुमति दी है, ताकि ऊर्जा पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सके।
डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में भी बढ़ोतरी
बुकिंग प्लेटफॉर्म पर बढ़ते ट्रैफिक के बीच डिजिटल फ्रॉड के मामले भी सामने आने लगे हैं। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक चैनलों के माध्यम से ही LPG बुकिंग करें।
वैकल्पिक उपकरणों की मांग बढ़ी
इस संकट के बीच कई रिटेलर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने बताया है कि इंडक्शन कुकटॉप, इलेक्ट्रिक राइस कुकर और इलेक्ट्रिक केटल जैसे उपकरणों की बिक्री में तेजी आई है, क्योंकि लोग गैस के विकल्प तलाश रहे हैं।
ऊर्जा सुरक्षा में कोयले की भूमिका
भारत अपनी कुल LPG खपत का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है और यह आयात उन्हीं समुद्री मार्गों से होता है जो वर्तमान भू-राजनीतिक तनाव से प्रभावित हैं।
ऐसे समय में कोयला देश के लिए एक स्थिर घरेलू ऊर्जा स्रोत के रूप में सामने आता है। भारत में बिजली उत्पादन का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा कोयला आधारित संयंत्रों से आता है, जिससे अस्पतालों, उद्योगों, सार्वजनिक परिवहन और घरों को लगातार बिजली मिलती रहती है।






