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ईरान युद्ध नहीं चाहता, बातचीत के दौरान हुआ हमला: डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही

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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि Dr. Abdul Majid Hakim Elahi ने कहा है कि ईरान की मंशा कभी युद्ध की नहीं रही। उनका कहना है कि ईरान विवाद का समाधान बातचीत के जरिए निकालना चाहता था, लेकिन वार्ता के दौरान ही उस पर हमला कर दिया गया, जिसके बाद हालात बिगड़ गए।

“ईरान को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं”

इंटरव्यू में डॉ. इलाही ने कहा कि क्षेत्र में पैदा हुई मौजूदा स्थिति के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उनके मुताबिक यह संकट दूसरे पक्ष की कार्रवाई का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि ईरान नहीं चाहता कि किसी भी देश के लोगों को गैस, पेट्रोल या तेल जैसी जरूरी चीजों की कमी का सामना करना पड़े। साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील करते हुए विश्व नेताओं से स्थिति को शांत कराने के लिए आगे आने को कहा।

अमेरिका पर लगाया आरोप

डॉ. इलाही ने Donald Trump के उस दावे को खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि तेहरान बातचीत करना चाहता है। उन्होंने कहा कि इस समय ईरान अमेरिका से बातचीत नहीं करना चाहता, क्योंकि युद्ध की शुरुआत उसी की ओर से हुई।

उन्होंने कहा, “हम दो बार उनके साथ बातचीत कर रहे थे और उसी दौरान उन्होंने हम पर हमला कर दिया। हमारे साथ उनका अनुभव अच्छा नहीं रहा।”

जनता जवाबी कार्रवाई के समर्थन में

डॉ. इलाही ने कहा कि ईरान के लोगों को युद्ध का अनुभव है और देश पहले भी Iran–Iraq War जैसी लंबी लड़ाई का सामना कर चुका है। उन्होंने कहा कि ईरान की सड़कों पर लोग जवाबी कार्रवाई के समर्थन में नारे लगा रहे हैं और देश की रक्षा के लिए तैयार हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर क्या कहा

Strait of Hormuz से भारतीय जहाजों के आवागमन के सवाल पर डॉ. इलाही ने कहा कि भारत के जहाजों को गुजरने की अनुमति देने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि ईरान को भारत के लोगों से समर्थन मिला है और दोनों देशों के बीच दोस्ती मजबूत है।

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