Raigarh News: बीएस स्पंज कंपनी के खिलाफ ग्रामीणों ने खोला मोर्चा, कलेक्टर से की शिकायत; सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप

बड़गांव में करीब 160 एकड़ जमीन की खरीदी और बाउंड्री निर्माण पर उठे सवाल, ग्रामसभा की अनुमति के बिना काम शुरू करने का आरोप; सीमांकन कर कार्रवाई की मांग
रायगढ़। जिले के बड़गांव में बीएस स्पंज प्राइवेट लिमिटेड को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। गांव के ग्रामीणों ने कंपनी के खिलाफ कलेक्टर को लिखित आवेदन सौंपकर कथित अनियमितताओं की जांच और कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों ने कंपनी पर शासकीय राजस्व भूमि पर कब्जा करने, बिना विधिवत सीमांकन के बाउंड्री निर्माण कराने और पेड़ों की कटाई शुरू करने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि इस संबंध में पहले भी प्रशासनिक अधिकारियों को शिकायतें दी गई थीं, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।
करीब 160 एकड़ जमीन की खरीदी को लेकर उठाए सवाल
ग्रामीणों ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि कंपनी संचालक ने गांव में करीब 160 एकड़ जमीन ग्रामीणों से कथित तौर पर बहला-फुसलाकर और पूरी जानकारी दिए बिना खरीदी है। इस जमीन पर औद्योगिक इकाई स्थापित करने की तैयारी की जा रही है।
ग्रामीणों ने जमीन के डायवर्सन की प्रक्रिया में भी आवश्यक जानकारी छिपाए जाने का आरोप लगाया है। उनके मुताबिक, इस मामले को लेकर 6 अक्टूबर 2025 को तहसीलदार तमनार और एसडीएम घरघोड़ा के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत की गई थी।
ग्रामसभा ने बिना अनुमति काम शुरू नहीं करने का लिया था प्रस्ताव
ग्रामीणों के अनुसार, 26 नवंबर 2025 को आयोजित ग्रामसभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया था कि ग्रामसभा और ग्राम पंचायत की पूर्व अनुमति के बिना कंपनी किसी भी प्रकार का काम शुरू नहीं करेगी। ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रस्ताव की प्रतिलिपि संबंधित अधिकारियों और कंपनी को भी उपलब्ध कराई गई थी।
इसके बावजूद कंपनी की ओर से बिना विधिवत सीमांकन के बाउंड्री निर्माण और पेड़ों की कटाई शुरू करने का आरोप लगाया गया है। इस संबंध में 28 नवंबर 2025 को एसडीएम घरघोड़ा को भी शिकायत दी गई थी।
खसरा नंबर 145 की जमीन का दोबारा सीमांकन कराने की मांग
ग्रामीणों ने आवेदन में शासकीय राजस्व भूमि के खसरा नंबर 145 की स्थिति स्पष्ट करने के लिए राजस्व अभिलेखों के आधार पर दोबारा सीमांकन और जांच कराने की मांग की है।
उनका कहना है कि यदि जांच में शासकीय जमीन पर कंपनी का अवैध कब्जा पाया जाता है, तो संबंधित भूमि से कब्जा हटाकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। ग्रामीणों ने प्रशासन से भूमि के वास्तविक स्वरूप और स्वामित्व की स्थिति स्पष्ट करने की भी मांग की है।
पुरानी शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि जमीन खरीदी, डायवर्सन, बाउंड्री निर्माण और पेड़ों की कटाई से जुड़े मामलों में समय-समय पर शिकायतें, मांगपत्र और ग्रामसभा के प्रस्ताव प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत किए गए। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है।
उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और शिकायत में सामने आए तथ्यों के आधार पर जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की है।
जांच पूरी होने तक एकतरफा कार्रवाई नहीं करने का आग्रह
ग्रामीणों ने कलेक्टर से यह भी आग्रह किया है कि जांच पूरी होने तक पर्याप्त तथ्यों के परीक्षण के बिना किसी भी ग्रामीण के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई न की जाए। साथ ही, 26 नवंबर 2025 को पारित ग्रामसभा के प्रस्ताव का पालन सुनिश्चित कराने और ग्राम पंचायत की अनुमति के बिना संबंधित क्षेत्र में काम नहीं होने देने की मांग की गई है।
अब ग्रामीणों की शिकायत पर प्रशासन क्या कदम उठाता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। हालांकि, कंपनी पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और प्रशासनिक जांच के निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है।






